२६ वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में …

गुरुदेवजी ‘सनातन प्रभात’ के संस्थापक एवं संपादक बनना
काल की आहट को संत अचूकता से पहचानते हैं । गुरुदेवजी ने अपनी दूरदृष्टि से ‘हिन्दू राष्ट्र की स्थापना’ के लक्ष्य के लिए कार्यरत ‘सनातन प्रभात’ का शुभारंभ किया ।
गुरुदेवजी ने ३० अप्रैल १९९८ को साप्ताहिक ‘सनातन प्रभात’ आरंभ किया, जबकि ४ अप्रैल १९९९ को दैनिक ‘सनातन प्रभात’ का गोवा-सिंधुदुर्ग संस्करण आरंभ हुआ । वर्तमान समय में ‘सनातन प्रभात’ नियतकालिक मराठी दैनिक ‘सनातन प्रभात’ के ४ संस्करण, मराठी एवं कन्नड भाषा के साप्ताहिक, साथ ही हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा के पाक्षिक संस्करण, इन रूपों में प्रकाशित किया जा रहा है । गुरुदेवजी स्वयं इस नियतकालिक के संस्थापक एवं संपादक हैं । उन्होंने १९.४.२००० तक ‘संस्थापक एवं संपादक’ के रूप में ‘सनातन प्रभात’ का कार्यभार संभाला । ‘इतने उच्च स्तर के संत का किसी नियतकालिक का संस्थापक एवं संपादक होना’ पत्रकारिकता के इतिहास में एकमात्र घटना होगी !


‘सनातन प्रभात’ के माध्यम से साधक, पाठक, एवं धर्मप्रेमियों को तैयार करनेवाले गुरुदेवजी !
गुरुदेवजी ने उनके कार्यकाल में संपादन से संबंधित सेवा करनेवाले साधकों को राष्ट्रनिष्ठ एवं धर्मनिष्ठ पत्रकारिता सिखाई, साथ ही उन्होंने इन साधकों के मन पर ‘पाठक को प्रत्येक घटना की ओर समाज, राष्ट्र एवं धर्म के हित की दृष्टि से देखना सिखाना चाहिए’, यह विचार अंकित किया । गुरुदेवजी ने ही ‘सनातन प्रभात’ के ‘राष्ट्रद्रोही एवं धर्मद्वेषियों पर प्रहार, सामाजिक दुष्प्रवृत्तियों का निर्भयता से विरोध एवं तत्त्वनिष्ठा’, ये आभूषण तैयार किए हैं । ‘सनातन प्रभात’ की यह विशेषता है कि लाखों प्रतियों की बिक्रीवाले अन्य दैनिक के पाठक जो नहीं कर सकते, ‘सनातन प्रभात’ के कुछ पाठक राष्ट्ररक्षा एवं धर्मजागृति का वह कार्य कर रहे हैं !
गुरुदेवजी के मार्गदर्शन के कारण ही आज ‘सनातन प्रभात’ हिन्दुत्व का कार्य करनेवालों के लिए दिशादर्शक सिद्ध हुआ है !
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