तमिलनाडु की द्रमुक सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश के उपरांत भी थिरुपरंकुंद्रम् पर्वत पर दीपम् प्रज्वलित करने की अनुमति अस्वीकार करने के कारण उठाया गया कदम

मदुरै (तमिलनाडु) – यहां ४० वर्षीय पूर्णा चंद्रन् नामक व्यक्ति ने सर्वप्रथम पेरियार की प्रतिमा के समीप अपना वाहन रोका, तत्पश्चात् समीप ही स्थित पुलिस थाने में प्रवेश कर स्वयं को अग्नि के हवाले कर दिया । इसमें उनकी मृत्यु हो गई । घटना के कुछ ही समय पश्चात पूर्णा चंद्रन् का ध्वनि-संदेह (ऑडियो) सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हुआ । यह ध्वनि-संदेश उन्होंने स्वयं मृत्युपूर्व मुद्रित (रिकॉर्ड) किया था । उसमें उन्होंने उल्लेख किया कि, ‘थिरुपरंकुंद्रम् पर्वत पर दीपम् प्रज्वलित करने की अनुमति न मिलने से मैं अत्यंत व्यथित हूं । मंदिर की पवित्रता भंग न हो; इसलिए वहां आत्मदाह न करते हुए नगर में जाकर आत्मदाह करने का निर्णय ले रहा हूं ’, ऐसा भी उन्होंने कहा ।
क्या है प्रकरण ?
तमिलनाडु स्थित थिरुपरंकुंद्रम् पर्वत भगवान मुरुगन के ६ पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है । यहां प्रतिवर्ष कार्तिकेय दीपम् प्रज्वलित करने की परंपरा को लेकर दीर्घकाल से विवाद चल रहा है । मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने १ दिसंबर २०२५ को दीपस्तंभ पर दीपम् प्रज्वलित करने के निर्देश दिए थे; अपितु राज्य सरकार ने विधि-व्यवस्था तथा परंपरा का आधार लेते हुए इसे अनुमति प्रदान नहीं की । इस पर्वत पर दरगाह होने के कारण दीपम् का विरोध किया जा रहा है । पूर्णा चंद्रन् नियमित रूप से धार्मिक स्थलों पर जाने वाले व्यक्ति थे । मंदिर की अपकीर्ति न हो, ऐसी उनकी अभिलाषा थी । सरकार द्वारा न्यायालय के आदेश को कार्यान्वित न किए जाने से वे आहत थे । परिजनों को उनके इस उद्देश्य की तनिक भी कल्पना नहीं थी । उनके पश्चात् उनकी पत्नी एवं २ छोटे बच्चे हैं । वे एक चिकित्सा प्रतिनिधि थे ।
भाजपा की द्रमुक सरकार पर आलोचना
इस घटना के उपरांत तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन् तथा नेता के. अण्णामलाई ने इसे द्रमुक (द्रविड मुन्नेत्र कळघम् – द्रविड प्रगति संघ) सरकार की हिन्दूविरोधी नीतियों का परिणाम बताया; तथापि उन्होंने श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने एवं न्यायव्यवस्था पर विश्वास रखने का आवाहन भी किया ।
संपादकीय भूमिका
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