सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव देहली २०२५

भारत मंडपम्, नई देहली – कोल्हापुर के सव्यसाचि गुरुकुलम् के छात्रों ने १४ दिसंबर को सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में छत्रपति शिवाजी महाराज जी के काल के विभिन्न शस्त्रों के द्वारा युद्धकला का प्रदर्शन प्रस्तुत किया । इस युद्धकला ने उपस्थित सभी दर्शकों का मन जीत लिया । सभी ने खडे रहकर तालियों की गडगडाहट से इस युद्धकला का गौरव किया तथा युद्धकला प्रस्तुत करनेवाले सव्यसाचि गुरुकुलम् के आचार्य श्री. लखन जाधव तथा उनके छात्रों का खडे रहकर अभिवादन किया । जब सभागार में यह प्रदर्शन प्रस्तुत किया जा रहा था, उस समय हिन्दुत्वनिष्ठों ने ‘हर हर महादेव’, ‘जय श्रीराम’, ‘जय भवानी, जय शिवाजी’, ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय हो !’, ‘धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज की जय हो’ के उत्स्फूर्त नारे लगाए ।

इस प्रदर्शन में लाठी, भाला, दांडपट्टा, कुल्हाडी, चक्रीपाश, तलवार, ईंट आदि शिवकालीन शस्त्रकलाएं प्रस्तुत की गईं । एक ही समय अनेक शत्रुओं के साथ कैसे लडना चाहिए ?; किसी ने युवति को छेडा, तो उसका प्रतिकार कैसे करना चाहिए ?, इसका भी प्रदर्शन भी प्रस्तुत किया गया । इन रोमांचकारी प्रदर्शनों के कारण उपस्थित धर्मप्रेमियों में वीररस जागृत हुआ तथा भविष्य में आनेवाले संकटों से दो-दो हाथ करने का उनके मन का निश्चय दृढ़ हुआ ।
आचार्य लखन जाधव तथा छात्रों को किया गया सम्मानित !

सव्यसाचि गुरुकुलम् के आचार्य श्री. लखन जाधवगुरु जी तथा प्रदर्शन प्रस्तुत करनेवाले छात्रों को हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे जी ने सम्मानित किया । इस अवसर पर लखन जाधवगुरु जी तथा उनके छात्रों ने सद्गुरु (डॉ.) चारुदत्त पिंगळे जी के आशीर्वाद लिए ।

युद्धकला के प्रदर्शनों के कुछ और क्षणचित्र :
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