सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव
शंखनाद महोत्सव की परिचर्चा में मान्यवर वक्ताओं की सर्वसम्मति !

नई दिल्ली, १४ दिसंबर (संवाददाता) : सनातन संस्कृति में बहुत पहले से पर्यावरण का विचार किया गया है । हमारे यहां वृक्षों, पर्वतों, नदियों आदि को देवता का स्थान दिया गया है । अतः हमने यदि सनातन संस्कृति आत्मसात की, तो उससे पर्यावरण की रक्षा होकर रहेगी, इस पर परिचर्चा में सहभागी मान्यवरों की सर्वसम्मति हुई । ‘सनातन संस्कृति, पर्यावरण एवं इतिहास की रक्षा’ विषय पर आधारित परिचर्चा में मान्यवर सहभागी थे । इस परिचर्चा का सूत्रसंचालन ‘जंबू टॉक्स’के संपादक श्री. निधीश गोयल जी ने किया । इस परिचर्चा में हरियाणा के बालाजी महाविद्यालय के श्री. जगदीश चौधरी जी, ‘प्रताप गौरव केंद्र’, उदयपुर के श्री. अनुराग सक्सेना जी एवं श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय की प्रा. रामादेवी जी ने भाग लिया ।
सनातन आत्मसात किया, तो पर्यावरण की हानि नहीं होगी ! – श्री. जगदीश चौधरी
जब व्यक्ति आधुनिक बन जाता है, तब समस्या उत्पन्न होती है । वर्तमान समय में तो व्यक्ति ‘अल्ट्रा मॉडर्न’ बननेवाला है, तो उससे और समस्याएं आएंगी । दिल्ली में व्यक्ति जितना बडा, उतना ही उसके घर से अधिक कचरा फेंका जाता है । दिल्ली में चारों मुख्य सडकों की सीमाओं पर कचरे के पहाड बन गए हैं । मैंने उनमें से एक सीमा पर जमा कचरा हटाने हेतु हरियाणा सरकार के विरुद्ध अभियोग लडा । यहां कचरे की समस्या बहुत बडी है । दिल्ली में प्रदूषण बढा है । सनातन आत्मसात करने पर प्रदूषण नहीं होता तथा पर्यावरण की हानि नहीं होती; क्योंकि हम वृक्ष, नदी एवं पर्वत की पूजा करते हैं ।
महाराणा प्रताप का सच्चा इतिहास सामने लाएंगे ! – श्री. अनुराग सक्सेना
महाराणा प्रताप को पकडने हेतु मानसिंह डेढ महिना पूर्व से महाराणा प्रताप के राज्य के पास रूका हुआ था, जिससे महाराणा प्रताप क्रोधित होकर लडाई करने आएंगे तथा उन्हें उनके राज्य के बाहर हराया जा सके; क्योंकि महाराणा प्रताप के राज्य का क्षेत्र पर्वतीय होने के कारण उनके विरुद्ध लडना तथा उन्हें हराना कठिन था । अकबर स्वयं बडी प्रतिज्ञा लेकर महाराणा प्रताप को पकडने के लिए दिल्ली तक आया; परंतु उसने स्वयं आगे न आकर अन्यों को भेजा । ‘हल्दीघाटी के युद्ध में अनेक बार अकबर की सेना युद्ध हार रही थी ।’, ऐसा युद्ध में सहभागी सेनानी ने ही लिखा है । तो अंततः युद्ध हार गए, ऐसा हम कैसे लिख सकते हैं ? इसका अर्थ है कि सच्चा इतिहास इससे भिन्न होगा । उसे समाज के सामने लाना चाहिए । हम उसे समाज के सामने लाएंगे ।
‘तिरुमला तिरुपति’को पुण्यक्षेत्र बनाएं ! – प्रा. रामादेवी
‘तिरुमला तिरुपति’ एक पुण्यक्षेत्र है; परंतु आज उसे हानि पहुंचाई जा रही है । हम तिरुपति को पुण्यक्षेत्र बनाएंगे । हमारे पास अच्छा संविधान तथा अच्छे लोग हैं; इसलिए तिरुमला देवस्थान की हो रही हानि की अनदेखी न करें । देवता, देश एवं धर्म भिन्न नहीं हैं । ये सभी एक ही हैं । अतः हम उन्हें बचाने का प्रयास करेंगे ।
Sinhagad Pune : सिंहगढ पर लगाए ‘यह किला हिन्दुओं का है, यहां मुसलमानों को प्रवेश नहीं’ के फलक !
(और इनकी सुनिए…) ‘श्रीकृष्ण मुसलमान थे तथा ५ समय की नमाज पढते थे !’ – Maulana Jarjis Ansari
Dabur : ‘डाबर’ प्रतिष्ठान के पैकेटबंद मौसमी जूस में काला फफूंद मिला ।
Karnataka AI University : बेंगलुरु में देश का पहला सरकारी ‘एआई’ विश्वविद्यालय प्रारम्भ किया जाएगा ।
हिन्दु विवाह अधिनियम के अनुसार विवाह को वैध ठहराने के लिए केवल विवाह प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं है ।– Gujrat High Court
जम्मू न्यायालय ने पुलिस से अभिलेख की मांग की ।