कांग्रेस सांसद गोवाल कागडा पडवी की लोकसभा में हिन्दू-द्वेषी मांग !

नई देहली – महाराष्ट्र के नंदुरबार से कांग्रेस सांसद गोवाल कागडा पडवी ने लोकसभा में भाषण करते हुए आदिवासी समाज को हिन्दू धर्म से अलग करके उन्हें स्वतंत्र धर्म का स्थान देने की मांग की ।
उनका दावा था कि वर्ष १९३१ में ब्रिटिशों द्वारा की गई जनगणना में आदिवासियों को स्वतंत्र समूह में गिना गया था तथा उनकी संस्कृति किसी भी स्थापित धर्म में नहीं बैठती । (ब्रिटिशों ने भारत में सत्ता भोगने के लिए ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाकर हिन्दुओं में फूट डालने का प्रयास किया था । स्वतंत्रता के पश्चात कांग्रेस ने इसी नीति का अवलंब करते हुए हिन्दुओं को संगठित नहीं होने दिया, यही इससे स्पष्ट होता है ! – संपादक)
१. पडवी के मतानुसार ‘स्वतंत्र धर्म’ के रूप में आदिवासियों को पहचान मिलने पर समाज की सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहेगी तथा उनकी परंपराओं का संरक्षण होगा ।
२. यह बयान सामने आने के उपरांत सोशल मीडिया पर तीव्र प्रतिक्रियाएं आईं । अनेकों ने उदाहरण देते हुए कहा कि आदिवासी परंपराएं सदियों से हिन्दू धर्म से जुडी हुई हैं तथा प्रकृति पूजा हिन्दू परंपरा का मूलाधार है ।
३. इस विवाद की पृष्ठभूमि पर भाजपा के नेताओं ने कहा कि कांग्रेस का यह बयान समाज में फूट डालने वाला है और राष्ट्र की एकता के विरुद्ध है।
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