(और इनकी सुनिए…) ‘राम, लक्ष्मण आदर्श नहीं, अपितु क्रूर हैं !’

कर्नाटक की साहित्यकार बी.टी. ललिता नायक

बी.टी. ललिता नायक

दावणगेरे (कर्नाटक) – साहित्यकार बी.टी. ललिता नायक ने वक्तव्य दिया है कि रामायण के श्रीराम, लक्ष्मण एवं रावण आदर्श व्यक्ति नहीं, अपितु क्रूर हैं । वह शहर के ए.वी.के. महिला महाविद्यालय के सभागार में २३ नवंबर को आयोजित एक चर्चा-सत्र के समापन में बोल रही थीं ।


ललिता नायक द्वारा दिए गए हिन्दुत्व विरोधी बयान !

सभी को भक्ति के नाम पर आदर्श व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया !

जिसकी सब पूजा करते हैं, उस श्रीराम ने अपनी पत्नी पर संदेह किया तथा अपने भाई लक्ष्मण को उसे वन में छोडकर आने को कहा । राम की इच्छा थी कि वह क्रूर जानवरों का भोजन बन जाए; परंतु लक्ष्मण को तो ‘यह अनुचित है’ कहना चाहिए था; किंतु उसने ऐसा नहीं किया । लक्ष्मण को नाक काटने की आदत थी, इसीलिए उसने शूर्पणखा की नाक काट दी । महान पराक्रमी के रूप में पहचाने जाने वाले रावण ने चोरी करके दूसरे की पत्नी का अपहरण किया; परंतु इन सभी को भक्ति के नाम पर आदर्श व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है । (जिसके पास मुंह है, वह कुछ भी बकवास करने वाली ललिता नायक ! यदि वह अन्य धर्मों के संदर्भ में इस प्रकार के वक्तव्य देतीं, तो अब तक उन्हें ‘सर तन से जुदा’ (सिर काटने ) की धमकियां मिल चुकी होतीं ! – संपादक)

गांधी के हाथ में केवल चरखा !

शांति के प्रतीक बुद्ध के हाथ में कोई तलवार, ढाल या खड्ग नहीं है । म. गांधी के हाथ में केवल चरखा है; परंतु ‘हाल ही में’ (कुछ दिन पूर्व ही) श्रीराम के हाथ में धनुष-बाण दिया गया है । (‘हाल ही में’ शब्द का उपयोग करने वाली नायक को इतिहास पता नहीं है, ऐसा कैसे कहा जा सकता है ? हिन्दुओं का षडयंत्र पूर्वक भ्रमित करने का ही यह प्रयास है ! – संपादक)

मंदिर लोगों को अंधश्रद्धा की ओर धकेल रहे हैं !

मंदिर लोगों को अंधश्रद्धा की ओर धकेल रहे हैं । अंधश्रद्धा से बाहर निकलने के लिए शिक्षा ही एकमात्र उपाय है । (क्या नायक इस बारे में बोल पाएंगी कि मस्जिदों, मदरसों में आतंकवादी मिलते हैं ? क्या वह यह बता पाएंगी कि वहां कौन-सी ‘श्रद्धा’ सिखाई जाती है ? – संपादक)

संपादकीय भूमिका

  • इस प्रकार के बयान देना अब ‘फैशन’ हो गया है । ऐसे लोगों को अब हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए फांसी के दंड का प्रावधान करने वाला कानून बनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है ! 
  • ‘ललिता नायक मुसलमानों के श्रद्धास्थानों के संदर्भ में ऐसा वक्तव्य देकर दिखाएं’, ऐसी खुली चुनौती कोई हिन्दू धर्मप्रेमी उन्हें दे, तो क्या वह उसे स्वीकार करने का साहस दिखाएंगी ?