श्रीराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री. प्रमोद मुतालिक द्वारा व्यक्त ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के विषय में प्रशंसात्मक उद्गार !
‘प.पू. डॉ. आठवलेजी की कृपा से गोवा में ३ दिवसीय ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । उसका शब्दों में वर्णन करना असंभव है । इस महोत्सव में सहभागी प्रत्येक व्यक्ति को एक छोटे कुंभ पर्व के समान आनंद प्राप्त हुआ । राष्ट्रीय विचारों की गंगा में, भाव-भावनाओं एवं प्रेम-आत्मीयता की यमुना में, साथ ही गुरुजी की (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की) आध्यात्मिक जनजागृति एवं उत्कृष्ट मार्गदर्शन की सरस्वती नदी में स्नान कर हम सब पावन हुए । ‘गुरु का मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद हो, तो कुछ भी साध्य किया जा सकता है’, यह इस शंखनाद महोत्सव ने सिद्ध किया है । उत्कृष्ट कार्यकर्ता, निःस्वार्थ साधक, राष्ट्र के प्रति की अतुलनीय निष्ठा तथा गुरुदेवजी के प्रति पारदर्शी प्रेम-सम्मान इस महोत्सव की सफलता के आधारस्तंभ थे । साधक सदैव प्रसन्नचित्त रहते थे, जिससे प्रतिनिधियों में उत्साह का संचार होता था । साधकों के मुख पर कभी भी ऊबाऊपन अथवा थकान का लेश मात्र भी भाव दिखाई नहीं देता था । शांति, आत्मीयता, असीम उत्साह एवं संतोषजनक उत्तरों से इस महोत्सव में सहभागियों को गहरी प्रेरणा मिली ।

१. देश के विभिन्न हिन्दुत्वनिष्ठों को एकत्रित लाना दैवदुर्लभ कार्य !
विभिन्न हिन्दू संगठन एकत्रित हों, हिन्दू एकजुट हों तथा हिन्दू जागृत हों, ऐसा भाषण में बोलनेवाले अनेक हैं; परंतु सनातन संस्था के माध्यम से प.पू. डॉ. आठवलेजी देश एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के हिन्दू नेताओं को एकत्रित ले आए, यह अद्भुत एवं अकल्पनीय है । यह सिद्धि केवल प.पू. डॉ. आठवलेजी को ही प्राप्त है, ऐसा गर्व के साथ कहा जा सकता है । गुरुदेवजी की तपस्या एवं त्याग की प्रतीक सनातन संस्था ने २५ वर्ष पूर्ण किए, उसकी इतिहास में प्रविष्टि हुई है ।
२. प.पू. डॉ. आठवलेजी की दूरदृष्टि
प.पू. डॉ. आठवलेजी ने उपेक्षित हिन्दू नेताओं, साथ ही कार्यकर्ताओं को मनःपूर्वक चुनकर उन्हें ‘हिन्दू राष्ट्ररत्न’ एवं ‘सनातन धर्मश्री’ पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया, जो उत्कृष्ट है । कोई भी हिन्दू संगठन, चाहे वह छोटा हो अथवा बडा, उसका विचार किए बिना वर्तमान परिस्थिति के अनुसार केवल आवश्यकता का विचार करना, यह प.पू. डॉ. आठवलेजी की दूरदृष्टि को दर्शाता है ।
मुझे मिला ‘सनातन धर्मश्री’ पुरस्कार तो ‘प.पू. डॉ. आठवलेजी का आशीर्वाद ही है !’

प.पू. डॉ. आठवलेजी के करकमलों से मुझे भी ‘सनातन धर्मश्री’ पुरस्कार मिला । उसके कारण मेरा जीवन धन्य एवं सार्थक हुआ है । मेरे मूल संगठन ने मुझे कभी पुरस्कार देना, तो दूर ही रहा; परंतु उसने न्यूनतम मेरी अवहेलना करना, अपमानित करना तथा मेरे विषय में दुष्प्रचार करना बंद किया, तब भी वह मेरे कार्य को प्राप्त मान्यता ही होगी ।’ प.पू. डॉ. आठवलेजी ने मेरे जैसे एक सामान्य कार्यकर्ता को सम्मानित कर मेरा दायित्व और बढाया है । इसका मैं सहर्ष स्वीकार करता हूं । इस पुरस्कार को मैंने ‘प.पू. डॉ. आठवलेजी के आशीर्वाद’ के रूप में स्वीकार किया है ।
गदग के एक पूज्य स्वामीजी द्वारा प्रमोद मुतालिक को ‘सनातन धर्मश्री’ पुरस्कार प्राप्त होने के कारण अभिनंदन किया जाना !
गदग के एक पूज्य स्वामीजी ने मुझे ‘सनातन धर्मश्री’ पुरस्कार प्राप्त होने के कारण मेरा अभिनंदन किया । उन्होंने मुझे कहा, ‘‘मुतालिकजी, देश के दूसरे सबसे बडे हिन्दू संगठन ‘सनातन संस्था’ ने आपका चयन कर पुरस्कार से सम्मानित किया, जो कर्नाटक के लिए गर्व की बात है । सरकारी पुरस्कार एक तो पैसों से खरीदे जाते हैं अथवा विधायक, सांसद अथवा मंत्रियों के प्रभाव से प्राप्त किए जाते हैं; परंतु आपको मिला यह पुरस्कार निरंतर परिश्रम, त्याग तथा हिन्दुत्व के लिए लडनेवाले एक प्रखर हिन्दूवीर को दिया गया पुरस्कार है । इसके लिए मैं सर्वप्रथम सनातन संस्था एवं प.पू. डॉ. आठवलेजी का अभिनंदन करता हूं । साथ ही आपका भी अभिनंदन !’’
– श्री. प्रमोद मुतालिक
३. महोत्सव में विभिन्न वैचारिक प्रवाह से हुई नई रचना
‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ में वैचारिकता का प्रवाह बह रहा था । उसमें वर्तमान आवश्यकता के अनुसार विभिन्न विषय सिखाए गए । विभिन्न वक्ताओं ने देश एवं धर्म की रक्षा हेतु धार्मिक आचरण की शक्ति व संघर्षपूर्ण वृत्ति की आवश्यकता पर मार्गदर्शन किया । उचित व्यक्तियों को पहचानना, योग्य नेताओं को प्रेरणा देना तथा कुछ चुनिंदा लोगों को पुरस्कार प्रदान करना उचित था । उसके कारण हिन्दुओं को प्रेरणा, प्रोत्साहन व अनुकरण हेतु मार्गदर्शन मिला ।
४. सनातन संस्था का रजत जयंती महोत्सव : प.पू. डॉ. आठवलेजी की तपस्या का फल !
सनातन संस्था का रजत जयंती महोत्सव एक बडी वैचारिक विजय है । गोवा, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के तत्कालीन कांग्रेस के राज्य सरकारों ने सनातन संस्था के साधकों का न जाने कितना उत्पीडन, अपमान तथा उन्हें बदनाम किया, साथ ही उन्हें बंदी बनाकर अभियोग प्रविष्ट किए । केवल इतना ही नहीं, अपितु हत्याओं के झूठे आरोपों के कारण सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने तक बात पहुंच गई । यह सब शांति से सहन कर, कानूनी लडाई लडकर तथा इसका वैचारिक दृष्टि से सामना कर विजय प्राप्त करना प.पू. डॉ. आठवलेजी की तपस्या का फल है । सनातन संस्था का उत्पीडन करनेवाली सरकारें बदल गईं तथा वर्तमान सरकारों ने सनातन संस्था के प्रति सम्मान, मान्यता एवं आदर दर्शाया, यह प्रचंड सिद्धि है । इसके लिए सनातन संस्था का सहस्रों बार अभिनंदन तथा प.पू. डॉ. आठवलेजी को कृतज्ञतापूर्वक प्रणाम !
– श्री. प्रमोद मुतालिक, संस्थापक अध्यक्ष, श्रीराम सेना, कर्नाटक. (२९.५.२०२५)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?