१ सहस्र ७०० वृक्षों की कटाई का नागरिकों ने किया विरोध; २०० से अधिक आपत्तियां प्राप्त !

  • आगामी सिंहस्थ कुंभपर्व में साधुग्राम बनाने का प्रकरण !

  • आपत्तियों के लिए शीघ्र ही सुनवाई होगी

  • मत है कि वृक्षों की कटाई से अनुचित संदेश जाएगा

नाशिक – आगामी सिंहस्थ कुंभपर्व में लगभग १ सहस्र १५० एकड क्षेत्र पर साधुग्राम बनाने की योजना है । इसके लिए तपोवन में महानगरपालिका की ५४ एकड भूमि में अनुमानतः १ सहस्र ७०० विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों को काटने, कुछ की छंटाई करने, तथा पुनर्रोपण करने के संबंध में नोटिस देकर महानगरपालिका ने आपत्तियां एवं सुझाव मांगे थे । १८ नवंबर को इसकी समय सीमा समाप्त हो गई । इस संदर्भ में महानगरपालिका को २०० से अधिक आपत्तियां एवं सुझाव प्राप्त हुए हैं । उद्यान अधीक्षक विवेक भदाणे ने बताया कि ‘संबंधितों को सुनवाई के लिए बुलाने हेतु पत्र व्यवहार किया जाएगा । आपत्तियों की संख्या बडी होने के कारण २४ अथवा २५ नवंबर को सुनवाई रखी जाएगी ।’

इतनी बडी संख्या में वृक्षों की कटाई होने की बात सामने आने पर पर्यावरण प्रेमियों सहित नागरिकों ने विरोध किया । पेडों पर पीले निशान लगाए गए । पर्यावरण प्रेमियों ने यह भी कहा कि ‘कई पेड पुराने हैं तथा उन्हें ‘हेरिटेज वृक्ष’ के रूप में दर्ज किया जा सकता है । ऐसे वृक्षों को काटना न केवल पर्यावरणीय, अपितु आध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक दृष्टि से भी एक दुखद निर्णय होगा ।

१ सहस्र ७०० पेड काटने से नाशिक के जलवायु, जल भंडार एवं हवा की गुणवत्ता पर दीर्घकालिक घातक परिणाम हो सकता है । यदि संतों के निवास के लिए इतने बडी संख्या में वृक्षों की कटाई की गई, तो विश्व के सामने अनुचित संदेश जाएगा ।’

आपत्तियों में यह मांगे भी की गई हैं कि ‘वृक्षों की कटाई का निर्णय तत्काल स्थगित किया जाए, नागरिकों को आपत्तियों के लिए दी गई समय सीमा बढाई जाए, विशेषज्ञों के साथ प्रत्यक्ष संयुक्त निरीक्षण आयोजित किया जाए, उपलब्ध होने पर सभी पर्यावरणीय रिपोर्ट तथा वैकल्पिक स्थानों का मूल्यांकन सार्वजनिक किया जाए ।’

अतिरिक्त आयुक्त करिश्मा नायर ने आह्वान किया कि ‘पुराने वृक्षों को संरक्षित करने का दायित्व महानगरपालिका का है । अतः अफवाहों पर विश्वास न करें ।’