‘गुरुदेवजी ने (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने) वर्ष २०१४ में अध्यात्म की उच्च शिक्षा देना तथा आध्यात्मिक शोधकार्य करना, इन उद्देश्यों से ‘महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय’ नामक न्यास की स्थापना की । इस न्यास की ओर से विभिन्न विषयों पर आध्यात्मिक शोध कार्य किया जाता है ।

‘विश्व में बोली जानेवाली विभिन्न भाषाओं में ‘संस्कृत भाषा’ सर्वाधिक सात्त्विक है; पशुओं में भारतीय गाय सर्वाधिक सात्त्विक है; भारतीय शास्त्रीय संगीत के विशिष्ट राग सुनने के कारण व्यक्ति का आध्यात्मिक कष्ट घटता है; पाश्चात्य वाद्यों के नाद के कारण रजोगुण बढता है, जबकि भारतीय वाद्यों के कारण सत्त्वगुण बढता है; मानसिक स्वास्थ्य एवं मनुष्य जीवन की समस्याओं के मूल कारण आध्यात्मिक हैं’ आदि निष्कर्ष आध्यात्मिक शोध कार्याें से निकले हैं । महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय ने २० राष्ट्रीय एवं १०० अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषदों में ऐसे शोधकार्याें पर आधारित शोधनिबंध प्रस्तुत किए हैं, जिनमें से १४ शोधनिबंध सर्वाेत्कृष्ट सिद्ध हुए हैं !’
– श्री. शॉन क्लार्क, आध्यात्मिक शोधकार्य विभाग, महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी अवतारी पुरुष हैं ! – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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