
१. तिथि : मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा, ५ नवंबर २०२५ (उ.भा)
२. महत्त्व : कुलस्वामी,
कुलस्वामिनी एवं इष्टदेवता के अतिरिक्त अन्य देवताओं की पूजा भी वर्ष में किसी एक दिन करना तथा उनको भोग प्रसाद अर्पण करना आवश्यक होता है । यह इस दिन किया जाता है ।
३. पूजन : इस दिन अपने
कुलदेवता तथा इष्टदेवता सहित, स्थानदेवता, वास्तुदेवता, ग्रामदेवता और गांव के अन्य मुख्य उपदेवता, महापुरुष, वेतोबा इत्यादि निम्न स्तरीय देवताओं की पूजा कर उनकी रुचि का प्रसाद पहुंचाने का कर्तव्य पूर्ण किया जाता है । देवदीपावली पर पकवानों का महानैवेद्य (भोग) चढाया जाता है ।
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