
कोल्हापुर : यहां के मुंबई उच्च न्यायालय की ‘सर्किट बेंच’की ओर से कॉ. गोविंद पानसरे हत्या प्रकरण के संदिग्ध डॉ. वीरेंद्रसिंह तावडे को जमानत पारित की गई, इससे मैं आनंदित हूं । डॉ. तावडे कॉ. गोविंद पानसरे हत्या अभियोग के एक संदिग्ध हैं तथा उन्हें ९ वर्षाें तक कारागृह में रहना पडा । डॉ. वीरेंद्रसिंह तावडे को वर्ष २०१८ में कोल्हापुर के जिला एवं सत्र न्यायालय ने जमानत दी थी; परंतु उसी न्यायालय के अगले न्यायाधीश ने ‘उनके विरुद्ध पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध हैं’, इस कारण से जमानत निरस्त की । डॉ. तावडे द्वारा इस निर्णय को मुंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दिए जाने के उपरांत अंततः मुंबई उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दी । मुंबई उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि सत्र न्यायालय को स्वयं के ही आदेश के पुनरावलोकन का अधिकार नहीं है, साथ ही सहआरोपी सहआरोपी शरद कळसकर एवं अमोल काळे ने समानता के सिद्धांत पर जमानत दी गई थी । वे दोनों ६-७ वर्षाें तक कारागृह में थे । दीर्घकालीन कारावास एवं षड्यंत्र के विषय में ठोस प्रमाण न होने से डॉ. तावडे को भी जमानत दी गई ।
सरकारी पक्ष के दावों में तथ्य नहीं है !इस प्रकरण में तर्कवाद करते हुए पूर्व न्यायाधीश तथा मुंबई उच्च न्यायालय की अधिवक्ता पुष्पा गनेडीवाला ने कहा, ‘‘इस प्रकरण में षड्यंत्र होने का तथा डॉ. तावडे का उल्लेख किया जाता है; परंतु इस प्रकरण के चल रहे अन्वेषण में नया कुछ भी सामने नहीं आता है; इसलिए अभियोजन पक्ष इसमें जो विभिन्न दावे कर रहा है, उसमें तथ्य नहीं है ।’’ |
मुंबई के जुहू समुद्र तट पर कचरे का साम्राज्य !
UK Mandir Auction : ब्रिटेन में नीलामी में मंदिर का स्थान मुसलमानों को बेचा !
वर्ष २०२२-२३ में मुंबई के ४ सहस्र ६३ वृक्ष कंक्रीटीकरण (काँक्रिटीकरण) से मुक्त, परंतु अभी भी वे प्रकार निरंतर जारी
मुंबई पर २६/११ का आतंकवादी आक्रमण कांग्रेस और आई.एस.आई. (ISI) ने मिलकर कराया था ! – R.V.S. Mani
लोकल रेलगाडी में वातानुकूलन यंत्र १५ मिनट तक बंद रहा यात्रियों का दम घुटा तथा अनेक महिलाएं अचेत हुईं
Chhattisgarh High Court : ‘हिन्दू एक गाली है, जिसका अर्थ चोर, डाकू, लुटेरा तथा गुलाम होता है’ ऐसा कहने वाले ईसाई संगठन के ११ लोगों के विरुद्ध प्रविष्ट अपराध निरस्त नहीं होगा ।