(और इनकी सुनिये…) ‘रामराज्य का अर्थ केवल हिन्दुओं का राज्य नहीं !’

सर्वोच्च न्यायालय के निवृत्त न्यायमूर्ति अभय ओक

सर्वोच्च न्यायालय के निवृत्त न्यायमूर्ति अभय ओक

पुणे – वर्तमान में ‘रामराज्य’ का अर्थ ‘केवल हिन्दुओं का राज्य’ ऐसा निकाला जाता है । महात्मा गांधी ने राम को प्रतीक मानकर स्वातंत्र्य, सत्य एवं अहिंसा पर आधारित आदर्श राज्य अर्थात् ‘रामराज्य’ की संकल्पना प्रस्तुत की थी । भारतीय राज्यघटना में भी इन गांधी विचारों का समावेश है, ऐसा वक्तव्य सर्वोच्च न्यायालय के निवृत्त न्यायमूर्ति अभय ओक ने किया ।

(गांधी का रामराज्य का विचार कुछ भी हो, किन्तु हिन्दू समाज को तो यह भली-भांति ज्ञात है कि – ‘आदर्श व्यवस्था वाला, हिन्दू विचारधारा एवं हिन्दुत्व पर चलने वाला राज्य अर्थात् रामराज्य अथवा हिन्दू राष्ट्र ही है’ । इसलिए इस प्रकार के वक्तव्य कर के हिन्दुओं का बुद्धिभेद करने का कोई प्रयत्न नहीं होना चाहिए ! – संपादक)

‘महाराष्ट्र गांधी स्मारक निधि’ एवं ‘युवक क्रांति दल’ की ओर से ‘गांधी सप्ताह’ का आयोजन किया गया था । उसमें ‘नागरिकों के संवैधानिक कर्तव्य’ विषय पर ओक बोल रहे थे ।

न्यायमूर्ति ओक ने आगे कहा – ‘‘राज्यघटना ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी है ; परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि मन में जो भी आए वह बोला जाए । वर्तमान में विचारस्वातंत्र्य पर अंकुश लाने के प्रयत्न हो रहे हैं । विनोद, कविता, चलचित्र आदि के माध्यम से विचार प्रस्तुत करने पर राजद्रोह के मामले प्रविष्ट किए जाते हैं । विकास की अयोग्य संकल्पनाओं के कारण पर्यावरण का अंत हो रहा है । प्रदूषणमुक्त एवं शांतिमय जीवन प्रत्येक का अधिकार है ; परंतु दुर्भाग्य से विचारों का प्रदूषण भी बढ़ा है ।’’

(विचारों का प्रदूषण साम्यवादी, प्रगतिवादी (अधोगामी), निधर्मीवादी, समाजवादी तथा हिन्दू धर्मविरोधियों की ओर से ही फैलाया जा रहा है, यह ध्यान में रखना चाहिए ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका

भारत में हिन्दू सहिष्णु हैं, इसलिए कोई भी उठकर हिन्दुओं को उकसाने का प्रयत्न करता है । यही कथन यदि ‘इस्लाम का राज्य अर्थात् कुरआन एवं शरीयत पर आधारित राज्य नहीं !’ ऐसा पूर्व न्यायमूर्तियों ने किया होता, तो क्या उनका यह साहस हुआ होता ?