‘आई लव मोहम्मद’ यह फलक घरों के द्वार पर ही लगाने का विरोध करने पर हिन्दुओं पर आक्रमण

दावणगेरे (कर्नाटक) – उत्तरप्रदेश के कानपुर में प्रारंभ हुआ ‘आई लव मोहम्मद’ लिखा हुआ फलक का विवाद अब उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाणा तथा अब कर्नाटक राज्य में भी पहुंच गया है । दावणगेरे के कार्ल मार्क्स नगर में मुसलमानों ने हिन्दुओं के घरों के द्वार पर ही ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे हुए फलक लगाए थे । इसका हिन्दुओं ने विरोध किया तो मुसलमानों ने हिन्दुओं के घरों में घुसकर हिन्दुओं को, विशेषत: घरों की हिन्दू महिलाओं को लात-घूँसों से मारपीट की, ऐसी घटना २४ सितम्बर की रात घटी । इसमें ३ लोग घायल हुए तथा उपचार के लिए उन्हें दावणगेरे जिला चिकित्सालय में भर्ती किया गया है ।
१. ३ दिन पूर्व भी ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे हुए फलक लगाए गए थे । इसका हिन्दुओं ने विरोध करने पर वे हटाए गए थे ।
२. फिर भी २४ सितम्बर की रात मुसलमानों ने ‘आई लव मोहम्मद’ के फलक हिन्दुओं के घरों के द्वार पर ही लगाए । ‘ये फलक यहां मत लगाओ’ ऐसा कहने पर विवाद बढ गया । यह विवाद कुछ युवकों में मारपीट तक पहुंच गया ।
३. ‘आई लव मोहम्मद’ का फलक ब्लेड से फाडा गया, ऐसी झूठी सूचना सामाजिक माध्यमों से प्रसारित करने पर वहां २०० से अधिक मुसलमान एकत्र हुए एवं उन्होंने हिन्दुओं को उनके घरों में घुसकर मारपीट की, ऐसी सूचना पीडित हिन्दुओं ने दी ।
४. वहां केवल २ हिन्दुओं के ही घर हैं । हिन्दुओं के घरों को लक्ष्य कर पथराव करने पर हिन्दू नेताओं ने आक्रोश व्यक्त किया है । ‘भूमि जिहाद’ के लिए हिन्दुओं के घरों को लक्ष्य कर पथराव किया जा रहा है । ‘लांगूलचालन की राजनीति के कारण ऐसी घटनाएं हो रही हैं । पथराव करने वालों पर कार्रर्वाई करनी चाहिए’, ऐसी मांग उन्होंने की है ।
५. घटना के उपरांत दावणगेरे के पुलिस अधीक्षक उमा प्रशांत ने सूचना दी कि फलक लगाने के कारण २ समाजों में विवाद हुआ था । हमारे पुलिस दल ने स्थिति नियंत्रण में कर दी है, स्थिति शांत है । पथराव की घटना की जांच कर कार्रर्वाई करेंगे ।
पुलिस के सामने आक्रमण होने पर भी पुलिस शांत ही !
हमारे घर की महिलाओं पर आक्रमण किया गया । पुलिस के सामने ही आक्रमण हुआ, फिर भी पुलिस शांत रही । (ऐसे पुलिसकर्मियों को तत्काल निकालना चाहिए ! – संपादक) हमें यहां रहने का भय लग रहा है, ऐसी आक्रोशित प्रतिक्रिया पीडित हिन्दुओं ने इस प्रकरण में व्यक्त की ।
संपादकीय भूमिका
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