सेंट ॲलॉयसिस पाठशाला की मान्यता निरस्त न की गई तो बडा आंदोलन करेंगे ! – हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों की चेतावनी

  • भुसावळ (जिला जळगाव) में ‘सद्भावना यात्रा’ के समय छात्रो को मस्जिद में ले जाने की घटना

  • भुसावळ (जिला जळगाव) में हिंदुत्वनिष्ठों के मोर्चे में संतों की भी सहभागिता !

सेंट ॲलॉयसिस विद्यालय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

भुसावळ — यहां के सेंट ॲलॉयसिस विद्यालय द्वारा आयोजित ‘सद्भावना यात्रा’ के समय छात्राओं को मुख पर स्कार्फ तथा छात्रों को सिर पर कपडा बांधकर मस्जिद में ले जाया गया था । इसके विरोध में भारतीय जनता पार्टी सहित हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने प्रांत कार्यालय पर मोर्चा निकाला । उसमें ‘इस विद्यालय की मान्यता निरस्त की जाए’ ऐसी मांग की गई । खंडशिक्षणाधिकारी को निवेदन देकर ७ दिनों में कानूनी कार्रवाई न होने पर बडा आंदोलन करने की चेतावनी हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों ने दी है ।

इस मोर्चे में गिरनारी मठ के स्वामी ब्रह्मानंद, फैजपूर के खंडेराव देवस्थान के महामंडलेश्वर पवनदास महाराज, महंत कन्हैयादास महाराज, फैजपूर के प्रवीणदास महाराज, फैजपूर स्थित श्रीकृष्ण महानुभाव मंदिर के महंत राजधरबाबा पुजदेकर सहित नगर के हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के पदाधिकारी, कार्यकर्ता, तथा राजनैतिक दलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सहभागी हुए थे ।

प्रांताधिकारी को निवेदन देते समय माहेश्वरी ट्रस्ट, भुसावळ शहर व्यापारी मंडळ, भारतीय जनता पार्टी के राहुल तायडे, श्री शिवप्रतिष्ठान हिंदुस्थान, सकल हिंदु समाज तथा श्री व्यंकटेश चॅरिटेबल ट्रस्ट — इन संगठनों ने निवेदन दिया ।

मोर्चे में हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों की मांगें —

१. विद्यालय प्रशासन एवं शिक्षकों पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के लिए में कठोर कार्रवाई की जाए ।

२. विद्यालय पर प्रशासक नियुक्त किया जाए ।

३. विद्यालय का शासकीय अनुदान बंद किया जाए ।

संस्था पर नियम के अनुसार कार्रवाई होगी — प्रांताधिकारी

‘शिक्षणाधिकारियों ने ३ सदस्यीय जांच समिति नियुक्त की है । ८ दिनों में जांच का ब्यौरा शिक्षणाधिकारी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को प्रस्तुत किया जाएगा । संस्था पर नियमानुसार कार्रवाई होगी’, ऐसी सूचना प्रांताधिकारी जितेन्द्र पाटिल ने दी ।

संपादकीय भूमिका

विद्यालय में श्रीमद्भगवद्गीता पढाने पर ‘शिक्षा का भगवाकरण’ हो रहा है, ऐसा शोर मचाने वाले प्रगतिवादी, नास्तिकतावादी, साम्यवादी — ये सभी लोग अब इस ईसाई विद्यालय के कृत्य पर मौन क्यों हैं ?