
ईरोड (तमिळनाडु) – ८ अगस्त को श्रावण मास में किया जानेवाला ‘वरमहालक्ष्मी व्रत’ के उपलक्ष्य में प्रातःकाल श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी अग्निहोत्र करते आहुति दी, उस समय उन्हें अग्नि की ज्वालाओं का आकार कमलपुष्प जैसा दिखा । उन्हें प्रतीत हुआ कि ‘इसके माध्यम से वरमहालक्ष्मी तक प्रार्थना पहुंची एवं उन्होंने आशीर्वाद दिया ।’ (९.८.२०२५)

| सूक्ष्म : व्यक्ति के स्थूल अर्थात प्रत्यक्ष दिखनेवाले अवयव नाक, कान, नेत्र, जीभ एवं त्वचा, ये पंचज्ञानेंद्रिय हैं । जो स्थूल पंचज्ञानेंद्रिय, मन एवं बुद्धि के परे है, वह ‘सूक्ष्म’ है । इसके अस्तित्व का ज्ञान साधना करनेवाले को होता है । इस ‘सूक्ष्म’ ज्ञान के विषय में विविध धर्मग्रंथों में उल्लेख है ।
इस अंक में प्रकाशित अनुभूतियां, ‘जहां भाव, वहां भगवान’ इस उक्ति अनुसार साधकों की व्यक्तिगत अनुभूतियां हैं । वैसी अनूभूतियां सभी को हों, यह आवश्यक नहीं है । – संपादक |
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