नगरीय (अर्बन) नक्सलवाद की समस्या का वास्तविक जनक कांग्रेस है ! – माधव भंडारी, वरिष्ठ भा.ज.पा. नेता एवं प्रवक्ता

पुणे में ‘बढते नगरीय नक्सलवाद एवं जनसुरक्षा अधिनियम’ इस विषय पर आयोजित विशेष संगोष्ठी में १,००० से अधिक देशभक्त सम्मिलित हुए

(बाएंसे) व्यासपीठपर  उपस्थित श्री. अभिजीत जोग, अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, श्री. माधव भांडारी, श्री. प्रसाद काथे, श्री. सुनील घनवट और श्री. विक्रम भावे

पुणे, २० अगस्त (समाचार) – वर्ष १९४२ में, स्वतंत्रता संग्राम सफल न हो सके, इसलिए इतिहास में यह अंकित है, कि साम्यवादियों ने अंग्रेजों को सहयोग किया था । स्वतंत्रता के उपरांत, तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ऐसे अंग्रेज हस्तकों को सम्मान देने का काम किया । बंगाल का नक्सलवाद हो या पंजाब में खालिस्तानी समस्या, कांग्रेस ने कभी भी उनके समाधान का कठोर प्रयास नहीं किया । वरिष्ठ भा.ज.पा. नेता एवं प्रवक्ता श्री माधव भंडारी ने सशक्त पद्धति से कहा कि आज देश के सामने नगरीय नक्सलवादी समस्या का वास्तविक जनक कांग्रेस है । १९ अगस्त को ‘राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति’ द्वारा पुणे के तिलक स्मारक मंदिर में ‘बढता नगरीय नक्सलवाद एवं जनसुरक्षा कानून’ विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया था, वे इसी संगोष्ठी में बोल रहे थे ।

विशेष संगोष्ठी में उपस्थित धर्मप्रेमी, अभ्यासू और हिन्दू श्रद्धालु

वक्ताओं के भाषणों का श्रोताओं ने सहज तालियों से उत्तर दिया !

संगोष्टी में प्रस्तुत विषय, वामपंथ का रहस्योद्घाटन , ने वक्ताओं के भाषणों का सहज तालियों से उत्तर दिया एवं साथ ही ‘जय श्री राम’, ‘जयतु जयतु हिन्दूराष्ट्रम’ सहित विभिन्न नारे भी लगाए ।

इस संगोष्ठी में ‘असत्यमेव जयते’ एवं’ वाळवी (वामपंथी दीमक)’ पुस्तकों के प्रसिद्ध लेखक श्री अभिजीत जोग, हिन्दू विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक श्री सुनील घनवट, लेखक-विचारक श्री विक्रम भावे एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रसाद काथे जैसे गणमान्य व्यक्ति सम्मिलित हुए । पुणे जिला एवं राज्य भर से विभिन्न क्षेत्रों के १,००० से अधिक राष्ट्रवादी, हिन्दू श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी इस संगोष्ठी में उपस्थित थे । हिन्दू जनजागृति समिति के श्री सतीश कोचरेकर ने संगोष्ठी में प्रस्तावना प्रस्तुत की, जबकि श्री चेतन तागडे ने इसका संचालन किया ।

माधव भंडारी ने आगे कहा,

माधव भंडारी

१. मैं अनेक वर्षों से वामपंथियों एवं कम्युनिस्टों का पाखंड देख रहा हूं । समाजवादी कभी सत्यनिष्ठा से काम नहीं करते । वे कहते कुछ हैं एवं करते कुछ हैं । उनमें से अनेक के घरों में देवताओं के मंदिर हैं । वे घर में पूजा करते हैं एवं बाहर हिन्दू धर्म एवं देवताओं की आलोचना करते हैं ।

वामपंथी भारत को ‘देश’ नहीं मानते ! – माधव भंडारी

इस अवसर पर, श्री विक्रम भावे ने कहा, ‘जब मैं कारागार में था, तब मैंने कोरेगांव भीमा प्रकरण में बंदी किए गए एक नक्सली का आरोपपत्र देखा था । इस आरोपपत्र के साथ, एक छोटी सी टिप्पणी भी संलग्न थी । इस टिप्पणी में उल्लेख किया गया था कि जंगल में नक्सलियों को कितना अल्पाहार एवं भोजन दिया जाना चाहिए एवं’बाबरी के पतन को विरोध दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए’ । इस पुस्तक में अनेक ऐसी चौंकाने वाली बातें थीं, जिनके संबंध में हम सोच भी नहीं सकते ।” इस संबंध में श्री माधव भंडारी ने कहा, ”वामपंथी ‘भारत’ को एक देश नहीं मानते, यह बहुत भयावह स्थिति है । इन सभी वामपंथियों एवं नक्सलवादियों का आदर्श चीन का ‘माओ’ है एवं उसी के साहित्य के आधार पर यहां के नक्सलवादी एवं साम्यवादी साहित्य रचते हैं ।

२. नक्सलवाद, जो गत काल में केवल गांवों एवं जंगलों तक ही सीमित था, अब वह अत्यंत भयावह हो गया है एवं नगरों के बुद्धिजीवी वर्ग तक विस्तृत हो गया है ।

३. यह नक्सलवाद बौद्धिक हिंसा का कारण बनता है, अतः वर्तमान में ‘जन सुरक्षा अधिनियम’ की सबसे अधिक आवश्यकता है ।

मानव मन को प्रभावित करने वाली संस्थाओं को नष्ट करना, यही वामपंथ का एजेंडा है (कार्यसूची)! – अभिजीत जोग, प्रसिद्ध लेखक

अभिजीत जोग

वामपंथ का एजेंडा मानव मन को प्रभावित करने वाली संस्थाओं को नष्ट करना, उन्हें वामपंथी विचारधारा से भ्रष्ट करना है । इसमें शिक्षण संस्थान, चलचित्र, परिवार व्यवस्था, जाति व्यवस्था, छोटे बच्चों में भ्रम निर्माण करना सम्मिलित है । कम्युनिस्ट निरंतर समाज में अराजकता निर्माण करने का प्रयत्न कर रहे हैं । उनका मुख्य उद्देश्य संपन्न एवं गरीब के मध्य खाई निर्माण करना, स्त्री एवं पुरुष के बीच विवाद निर्माण करना एवं येन केन प्रकारेण समाज में निरंतर संघर्ष उत्पन्न करते रहना है । साम्यवादी निरंतर भारतीय संस्कृति पर आक्रमण कर रहे हैं । अत: हमें यह लडाई वैचारिक स्तर पर लडनी होगी । देशहित का विचार, संस्कृति का विचार प्रबल करना ही होगा ।”

जिस तरह वारी में संविधान की दिंडी (यात्रा) निकाली जाती है, उसी तरह ‘शवपेटी’ के प्रदर्शन में संविधान की दिंडी निकाली जानी चाहिए ! – संगोष्ठी में आवाहन

(शवपेटी या ताजिया मुसलमानों के इमाम हुसैन की कब्र की प्रतिकृति है । इसे अनेक प्रकार एवं आकार में बनाया जाता है एवं प्रदर्शन में ले जाया जाता है ।)

संगोष्ठी में श्री अभिजीत जोग ने कहा, “वारकरियों द्वारा निकाली जाने वाली आषाढी वारी मूलतः एक धार्मिक आयोजन है, किन्तु अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति एवं कम्युनिस्ट ‘संविधान दिंडी’ आरंभ करके वारकरियों को भ्रमित करते हैं । उन्हीं साम्यवादियों को शव पेटी प्रदर्शन में भी यही प्रयोग करना चाहिए ।” इस पर श्री माधव भंडारी ने भी विचार व्यक्त किया कि हमें कम्युनिस्टों से शव पेटी प्रदर्शन में संविधान प्रदर्शित करने का आवाहन करना चाहिए ।

जनसुरक्षा अधिनियम का विस्तार बढाने एवं धाराओं व दंडों को कठोर बनाने के प्रयास करने होंगे ! – अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर, अध्यक्ष, हिन्दू विधिज्ञ परिषद

अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर

आप कितने भी नए कानून बनाएं , व्यवस्था की मानसिकता में परिवर्तन करना आवश्यक है । सभी हिन्दुओं को धर्म एवं ईश्वर में आस्था रखकर कार्य करना चाहिए । हिन्दुओं को ईश्वरीय अनुभूति का वरदान प्राप्त है । इसका लाभ उठाने के लिए, प्रत्येक कार्य के केंद्र में ईश्वर को रखने की प्रवृत्ति डालना चाहिए । विरोधियों की न्यूनता को पहचान कर, उन्हें उजागर करना आवश्यक है तथा उनके षड्यंत्रों का भक्ष्य न होते हुए हमें कार्य करना है। भारत की व्यवस्था को देखते हुए सतर्क रहना चाहिए । अभी जन सुरक्षा अधिनियम का विस्तार सीमित है एवं इसका विस्तार वृद्धिगत करने के लिए धाराओं व दंडों को कठोर बनाने के प्रयास करने होंगे ।

नक्सलवाद से लडने के लिए एक हिन्दू तंत्र का निर्माण होना चाहिए ! – सुनील घनवट, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक, हिन्दू जनजागृति समिति

सुनील घनवट

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के न्यास में इतने घोटाले हुए हैं, कि उस समिति में एक प्रशासक नियुक्त किया जाना चाहिए एवं उनकी वास्तविकता उजागर करनी चाहिए । उन्होंने कहा कि अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति कहती है कि उसको किसी से धन नहीं मिल रहा है; यद्यपि, हिन्दू जनजागृति समिति ने प्रमाणों के साथ तथ्य उजागर किया कि, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति को विदेशी प्रतिष्ठानों से धन प्राप्त हुआ है । वर्तमान में यदि डॉ. नरेंद्र दाभोलकर जीवित होते, तो अपने न्यास में हुए घोटालों एवं अनियमितता के कारण कारागार चले जाते । जिस प्रकार नक्सलवादियों ने सर्वोच्च न्यायालय तक उनका समर्थन करने वाले बुद्धिजीवियों, आर्थिक सहायता एवं अभिभाषकों की एक श्रृंखला बनाई है, उसी प्रकार नक्सलवाद से लडने के लिए एक हिन्दू पारिस्थितिकी तंत्र (एक विचारधारा को व्यवस्थित रूप से आगे बढाने वाला तंत्र) बनाया जाना चाहिए । आर्थिक सशक्तता ही साम्यवादियों का बल है । कुछ कम्युनिस्ट लेखकों एवं अभिनेताओं ने अपने पुरस्कार लौटा दिए हैं (भारत सरकार से मिले पुरस्कार लौटा दिए हैं); किन्तु उन्होंने प्राप्त धन वापस नहीं किया है । यह उनके दोहरे व्यक्तित्व को दर्शाता है ।

हिन्दुओं को सचेत रहना चाहिए ! – प्रसाद काथे, वरिष्ठ पत्रकार

प्रसाद काथे

हिन्दू संस्कृति का कोई विकल्प नहीं है । अन्य संप्रदायों के अपने देश हैं; किन्तु हिन्दुओं का भारत के अतिरिक्त कोई अन्य आधार नहीं है । हमारे पूर्वजों ने अत्यंत कष्ट से अपनी संस्कृति का संरक्षण किया है; अत: अब हमें जागरूक होना होगा ।

हिंदुत्व हमारी संस्कृति का मूल है ! – विक्रम भावे, लेखक

विक्रम भावे

जब मैं विद्यालय में था, तब अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के कार्यकर्ता विद्यालय आते थे । वे हमसे पूछते थे, ‘क्या हाथी के मुंह वाला कोई देवता है, बंदर के मुंह वाला कोई देवता है ?’, ‘क्या श्री गुरुदेव दत्त का नाम जपने से कोई लाभ है ?’ अंनिस वाले ऐसे प्रश्न पूछते थे, जिनसे विद्यालयीन बच्चों के मन में हिन्दू धर्म के संबंध में भ्रम निर्माण होता था । अंनिस वाले कभी गिरजाघर में जाकर यह नहीं पूछते कि ‘बाइबल में लिखा है कि पृथ्वी चपटी है ।’ यह सच है या झूठ ?, वे कभी मदरसे में जाकर यह नहीं पूछते कि ‘स्वर्ग में ७२ हूरें (अप्सराएं) हैं या नहीं ?’ ।

कारागार में रहते हुए मुझे अनुभव हुआ कि नगरीय नक्सली, कारागृह से भारतीय संस्कृति के संबंध में विष प्रसारित करते रहे हैं । हिन्दुत्व हमारी संस्कृति का मूल है एवं हमें एक हिन्दू के रूप में इस लडाई में सम्मिलित होना होगा ।

प्रात: से हो रही वर्षा के उपरांत भी सम्मेलन में पुणे वासियों का अभूतपूर्व प्रतिसाद !

पुणे में गत २ दिनों से वर्षा हो रही है एवं सम्मेलन वाले दिन प्रात: से ही नगर में भारी वर्षा हो रही थी । अनेक मार्ग पानी से भर गए थे, जिससे यातायात अवरुद्ध हो गया था। इसके उपरांत भी पुणे वासियों की इस कार्यक्रम में उपस्थिति अभूतपूर्व थी । सम्मेलन के अंत में, सभाकक्ष पूर्णरूप से भर गया था एवं कुछ देशभक्तों ने खडे होकर कार्यक्रम सुना ।

उपस्थित गणमान्य – वीर सावरकर युवा मंच के डॉ. निलेश लोणकर, भोंगावली, पु. जाधव महाराज, श्री. भुकुम में ‘स्वयंभू श्री रामेश्वर देवस्थान ट्रस्ट’ के विजय माजिरे, मानद पशु कल्याण अधिकारी श्री राहुल कदम, ग्राहक पेठ के श्री सूर्यकांत पाठक, इतिहास के विद्वान श्री ऋत्विक कुलकर्णी, पुणे नगर भा.ज.पा. महासचिव श्रीमती प्रियंका शेडगे, श्री प्रल्हाद सायकर, मालेगांव विस्फोट प्रकरण से मुक्त हुए हिंदुत्व भक्त श्री समीर कुलकर्णी, प्रतापगढ उत्सव समिति के श्री विनायक सणस, विश्व हिन्दू परिषद के संयुक्त मंत्री श्री दत्ता पोकळे, श्री नाना क्षीरसागर, श्री मदन डांगी, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी श्री प्रकाश लोंढे, हिन्दू राष्ट्र समन्वय समिति के श्री सचिन घुले, समरसता आयोग जिला प्रमुख कविता राठौड, जेजुरी गड-कडेपठार, खंडोबा देवस्थान के ट्रस्टी श्री मंगेश जेजुरीकर, पवित्रम फाउंडेशन के निदेशक श्री प्रकाश श्रीमणी , गावठान से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ श्री प्रमोद वसहडकर, उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी के उप प्रमुख श्री भरत कुंभकार, वकील गायत्री खडके, हि.प्र. तुषार महाराज चौधरी, वनमाला शिंदे, श्री. आनंद ताठे-देशमुख, सनातन संस्था के अध्यक्ष श्री रमेश ओसवाल. (श्रीमती) मनीषा पाठक एवं पू. (श्रीमती) संगीता पाटिल।