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थिरूवनंतपूरम् (केरल) – केरल के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को १४ अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका दिवस’ के रूप में मनाने के आधिकारिक निर्देश दिए हैं । इस पर केरल में राजनीति की जा रही है । केरल के राज्यपाल राज्य में समानांतर सरकार चला रहे हैं, यह आरोप लगाते हुए सत्ताधारी साम्यवादी दल, साथ ही विरोधी कांग्रेस अंततः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आलोचना पर आ गए ।

१. इस विषय में राज्यपाल द्वारा प्रसारित परिपत्र में कहा गया है कि भारत के विभाजन की पीडा रेखांकित करनेवाली परिचर्चाएं तथा स्मृति समारोहों का आयोजन करें । आप इस दिवस का आयोजन कैसे करेंगे ?, इस विषय में कुलगुरुओं को कार्यान्वयन प्रारूप प्रस्तुत करें ।
२. इस पर राज्य सरकार के सामान्य शिक्षामंत्री वी. शिवनकुट्टी ने कहा कि यह समानांतर प्रशासन चलाने का प्रयास है । राज्यपाल किस विभाजन का उल्लेख कर रहे हैं ? स्वतंत्रता संग्राम में किसी प्रकार से सहभागी न होनेवाले रा.स्व. संघ ने समाज को तोडने का काम किया । राज्यपाल इस विचारधारा को आगे बढा रहे हैं ।
३. नेता प्रतिपक्ष तथा कांग्रेस के विधायक वी.डी. सतीशन् ने भी राज्यपाल की इस कृति की आलोचना करते हुए कहा कि राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख की अपेक्षा विभाजन की राजनीति के प्रवक्ता के रूप में काम कर रहे हैं ।
संपादकीय भूमिकादेश के विभाजन के समय हिन्दुओं को जो अनंत यातनाएं भोगनी पडी, वह आज की पीढी की समझ में आएं; इसके लिए मनाए जानेवाले इस दिवस का विरोध करना, तो एक प्रकार से मुसलमानसमर्थित विभाजन का समर्थन करना है ! ऐसे राजनीतिक दलों की तो मान्यता ही निरस्त की जानी चाहिए ! |
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