Bangladesh ‘Jizya’ Tax : बांग्लादेश में हिन्दू समेत अन्य धर्मावलंबियों पर ‘जजिया’ कर लगाने की मांग

(जजिया कर का अर्थ है – मुसलमान नहीं होने वाले लोगों की रक्षा के लिए उनसे ही प्राप्त किये जाने वाला कर ।)

ढाका (बांग्लादेश) – बांग्लादेश में रहने वाले मुसलमानों के अतिरिक्त अन्य धर्मियों को ‘जजिया कर’ देना पडेगा । मुसलमान ‘जकात’ (मुसलमान अपनी संपत्ति का कुछ भाग दान के रूप में धार्मिक कार्यों के लिए देते हैं) के लिए देते हैं, इसलिए अगर हिन्दू समान अधिकार चाहते हैं, तो उन्हें ‘जजिया’ देना होगा । यही शरीयत कानून के अनुसार उचित है, ऐसा वक्तव्य जमात-ए-इस्लामी नामक राजनैतिक समूह के नेता ने एक सार्वजनिक सभा में एक बार पुनः दिया है । इससे पहले भी उन्होंने कई बार ऐसा वक्तव्य दिया था ।

इस गंभीर वक्तव्य पर देश की अंतरिम सरकार (अस्थायी सरकार) के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने अब तक कोई स्पष्ट भूमिका नहीं ली है , ना उन्होंने इसका कोई विरोध किया है एवं ना कोई स्पष्टीकरण दिया है । इसी कारण यह चर्चा हो रही है कि ‘क्या इसके पीछे कोई षड्यंत्र है ?’

सूत्रों के अनुसार, यह मांग केवल धार्मिक नियमों के नाम पर नहीं की जा रही, अपितु इसके पीछे एक पूर्वनियोजित षड्यंत्र है । इसका मुख्य उद्देश्य हिन्दू, बौद्ध और ईसाई धर्मावलंबियों को आर्थिक रूप से दुर्बल करना, उन्हें द्वितीय श्रेणी का नागरिक बनाना तथा धार्मिक भेदभाव के आधार पर मुख्य सामाजिक धारा से अलग-थलग करना है ।

क्या हिन्दुओं को देना होगा दोहरा कर ?

हिंदुओं को धार्मिक कर यानी ‘जजिया’ कर भरना पड़ेगा।

अगर यह मांग सरकार के स्तर पर मान ली गई, तो बांग्लादेश के हिन्दुओं को नियमित करों के अतिरिक्त एक अलग धार्मिक कर यानी ‘ जजिया ‘कर भरना
पडेगा । इससे समाज में ध्रुवीकरण, तनाव और धार्मिक संघर्ष बढ़ सकता है ।

संपादकीय भूमिका

इस्लामी देश में अल्पसंख्यकों को कोई अधिकार नहीं होते, अपितु उनका धार्मिक उत्पीडन ही किया जाता है । दूसरी ओर कथित धर्मनिरपेक्ष भारत में अल्पसंख्यकों (विशेषतः मुसलमानों) को सिर पर बैठाया जाता है और बहुसंख्यकों को कुचला जाता है।