दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय

नई दिल्ली – दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड महामारी की पहली लहर के समय यहां तबलीगी जमात के मुख्यालय में आयोजित शिविर में सम्मिलित हुए विदेशी नागरिकों को अपने घरों में शरण देनेवाले भारतीय नागरिकों के विरुद्ध प्रविष्ट अभियोगों पर निर्णय दिया है । न्यायालय ने ७० भारतीय नागरिकों पर प्रविष्ट १६ अभियोगों को निरस्त करने का आदेश दिया । न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि इस प्रकरण में प्रविष्ट आरोपपत्र निरस्त किए जा रहे हैं; क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों एवं उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए इस अभियोगों को चलाना न्याय के हित में नहीं होगा ।
⚖️ Delhi High Court Quashes Cases Linked to Tablighi Jamaat Shelterers
🧾 16 FIRs canceled against 70 Indians who gave shelter to 190 foreign Tablighi Jamaat members during COVID lockdown (2020).
📉 Court cited lack of evidence & no benefit to justice in continuing the cases.… pic.twitter.com/SQaeKsTCGj
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) July 26, 2025
क्या था आरोप ?
इस प्रकरण में आरोप था कि ७० भारतीय नागरिकों ने लगभग १९० विदेशी नागरिकों को अपने घरों में शरण दी थी । ये नागरिक मार्च २०२० में दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए थे । दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता, महामारी रोग अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम एवं विदेशी नागरिक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत प्रकरण प्रविष्ट किए थे । पुलिस का कहना था कि लॉकडाउन के समय सरकार के आदेशों की अनदेखी करते हुए इन आरोपियों द्वारा विदेशी नागरिकों को घर में रोकना नियमों का उल्लंघन था ।
आरोपियों के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि आरोपियों की कोई आपराधिक इच्छा नहीं थी तथा ऐसे कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं जो उन्हें दोषी ठहरा सकें ।
तबलीगी जमात क्या है ?
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