भारत में बढ रहा ‘द मॉल जिहाद !’

केरल में प्रसिद्ध ‘लुलु’ के ‘मेगा मॉल्स’ लोकप्रिय हैं तथा अब वे कर्नाटक में फैल गए हैं । यहां यह बात ध्यान में लेनी होगी कि इस मॉल का मालिक कन्नूर, कासारगोड, कोजिकोड अथवा मलप्पुरम् में ऐसे मॉल्स नहीं बनाता, अपितु वह एर्नाकुलम्, तिरुवनंतपुरम्, कोट्टायम् तथा अब पलक्कड में मॉल्स बना रहा है । क्या आप इसका कारण जानते हैं ?

(टिप्पणी : ‘मॉल जिहाद’ अर्थात धर्मांध मुसलमानों द्वारा बडे व्यापारी प्रतिष्ठान आरंभ कर उस क्षेत्र के हिन्दुओं के व्यवसाय बंद कर देना तथा वहां हिन्दू युवतियों को नौकरियां देकर वहां काम कर रहे मुसलमान युवतियों को लव जिहाद चलाने का अवसर उपलब्ध कराना !)

भाग्यनगर के ‘लुलु मेगा मॉल’ का संग्रहित छायाचित्र

१. ‘लुलु मेगा मॉल्स’ आरंभ करने के पीछे ‘मॉल जिहाद’ का कुटील उद्देश्य

अ. पहली बात तो यह कि मुसलमानबहुल क्षेत्र में मुसलमानों द्वारा चलाए जानेवाली छोटी दुकानों के व्यवसाय में उन्हें बाधा नहीं बनना है । ‘काफिरों के (हिन्दुओं के) प्रदेश में मॉल बनाकर वह काफिरों के छोटे व्यवसाय ध्वस्त कर सकता है ।

आ. दूसरी बात यह कि वह एक मॉल में २० सहस्र कर्मचारियों की भर्ती करता है । इनमें से १५ सहस्र कर्मचारती मलप्पुरम् के मुसलमान युवक हैं तथा ५ सहस्र महिलाएं हिन्दू समाज की हैं । इस प्रकार ये १५ सहस्र पुरुष इन ५ सहस्र युवा काफिर (हिन्दू) लडकियों से संवाद करते हैं । अतः ‘लव जिहाद’ चलाने का यह उन्हें मिला सर्वाेत्तम अवसर है । इनमें से अधिकांश लडकियां चुप बैठती हैं; क्योंकि उनकी नौकरी संकट में आने की संभावना होती है ।

इ. तीसरी बात यह है कि १५ सहस्र निष्ठावान मुसलमान युवकों को एक परिवार के रूप में हिन्दुओं की भूमि पर स्थानांतर करने का अवसर मिलता है । विधानसभा चुनाव क्षेत्र में अपने समुदाय के प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम ३० सहस्र लोग पर्याप्त हैं ।

२. लुलु मेगा मॉल्स आरंभ करने के लिए पैसों की आपूर्ति करनेवाला कतार एवं अन्य अरब राष्ट्र

‘लुलु’ के मेगा मॉल्स सदैव ही काफिरों की भूमि पर ही क्यों आते हैं ?, इसके उक्त ३ कारण हैं तथा इसके लिए इस मॉल का मालिक कतार एवं अन्य अरब राष्ट्रों से पैसा जुटा रहा है, जो विश्व स्तर पर आतंकवाद को पैसों की आपूर्ति करने के लिए कुख्यात हैं । कतार तालिबान का सर्वाधिक समर्थक देश है तथा उस देश के साथ उनके अच्छे व्यावसायिक संबंध माने जाते हैं । मॉल का मालिक भी लंबे समय से जिहादियों को समर्थन दे रहा है ।

इस प्रकार ‘मॉल जिहाद’ पर माैन बहिष्कार करने से वह समाप्त हो जाएगा । इससे पूर्व जब यह विषय उठाया गया था, उस समय लोगों का प्रत्युत्तर था, ‘क्या वे इतने लोगों को नौकरियां नहीं देते ?’ ‘वे वैसे नहीं हैं’; परंतु अब धीरे-धीरे लोग इसे समझने लगे हैं । अतः प्रत्येक हिन्दू को इसे ध्यान में रखते हुए ‘रिलायंस’, ‘सेंट्रल’, ‘बिग बजार’ एवं ‘मॉल ऑफ जॉय’ जैसे मॉल्स के साथ खडे रहना चाहिए ।

(साभार : विभिन्न जालस्थल)