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हिंदी की ‘अनिवार्यता ‘ दिखाई गई तो हम ‘शक्ति’ दिखाएंगे ! – ‘विजय रैली’ में ठाकरे बंधुओं ने की गर्जनाहम किसी भाषा के विरुद्ध नहीं हैं । किसी के साथ अन्याय न करें; किन्तु यदि हाथ उठाया तो उसे उखाड फेंकें । मुंबई की रक्षा के लिए हमें साथ खडा होना है । हिंदी भाषा की ‘अनिवार्यता ‘ दिखाई गई तो हम ‘शक्ति’ दिखाएंगे । ‘हिंदू’ एवं ‘हिंदुस्थान’ स्वीकार्य हैं; किन्तु हिंदी भाषा को बलपूर्वक थोपना स्वीकार नहीं है । मराठी भाषा पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा । मराठी लोगों की एकता बनी रहनी चाहिए । मराठी लोगों को सावधान एवं सतर्क रहने की आवश्यकता है ! |
मुंबई – ‘एम’ केवल नगर निगम के लिए नहीं है, अपितु ‘एम’ ‘महाराष्ट्र’ के लिए है । ‘मराठी अभिमान को मत तोडो, मत भूलो ।’ भाषणों से अधिक अनिवार्य है कि हम एकजुट दिखें ।
इस अवसर पर मराठी लोगों की मजबूत मुट्ठी सभी ने देखी । अनाजीपंत ने हमारे बीच की दूरियां मिटाईं । हम साथ रहने के लिए साथ आए हैं । भाषा के मुद्दे को ऊपर ऊपर से दिखावटी रूप में लेने से काम नहीं चलेगा । भाजपा की नीति ‘उपयोग करो एवं फेंक दो’ की है । अब हम दोनों साथ आएंगे एवं उन्हें उखाड फेंकेगे । १९९२- ९३ के मुंबई दंगों में मराठी लोगों ने भी अमराठी लोगों को हिन्दू होने के कारण बचाया था । मराठी भाषी देशभक्त हिन्दू हैं । यदि आप न्याय के लिए आंदोलन करने वाले मराठी व्यक्ति को गुंडा कहते हैं, तो हम गुंडे हैं । मराठों एवं गैर मराठों के बीच भेद निर्माण करने के लिए ‘बटेंगे तो कटेंगे’ का नारा उपयोग किया गया ।

ठाकरे समूह के प्रमुख उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने सभी मतभेदों को समाप्त करके मराठी लोगों की एक सशक्त एकजुटता बनाने का आवाहन किया । महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे एवं उद्धव ठाकरे ने वर्ली डोम में एक ‘विजय सभा’ में घोषणा की, कि वे मराठी के आधार पर एक साथ आएंगे एवं अब से एक साथ रहेंगे । यह सभा ५ जुलाई को आयोजित की गई थी ।
मराठी के लिए एकता बनी रहे एवं बालासाहेब का स्वप्न पूरा हो ! – राज ठाकरे

हिंदी की अनिवार्यता के विरुद्ध माेर्चे की बात से ही भाजपा को पीछे हटना पडा । महाराष्ट्र किसी भी विवाद एवं लडाई से बडा है । देवेंद्र फडणवीस हमें साथ लाने में सफल रहे, जो माननीय बालासाहेब समेत कई लोग नहीं कर पाए । त्रिभाषा सूत्र केंद्र एवं राज्य के बीच समन्वय एवं केंद्र की शिक्षा नीति के लिए था । राज्य में इसकी कोई उपयोगिता नहीं है । हिन्दी भाषी राज्य में कौन सी तीसरी भाषा लागू होगी ? हिन्दी भाषी राज्य विकसित नहीं हुए है । लोग उन राज्यों से यहां आजीविका के लिए आते हैं । मराठों ने १२५ वर्ष तक हिन्दी राज्यों पर राज्य किया, किन्तु हमने मराठी नहीं थोपी । क्या हम दूसरी भाषाएं सीख कर मराठी पर गर्व नहीं कर सकते ? बालासाहेब ठाकरे ने भी अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा ली थी ।
मुंबई को महाराष्ट्र से विलग करना है, इसलिए उन्होने भाषा का विषय लिया एवं उसका परीक्षण किया, किन्तु जब महाराष्ट्र में आग लगती है, तो आप समझ गए होंगे कि क्या होता है । हम शांतिप्रिय हैं, तो क्या आप हम पर कुछ भी थोपने का प्रयत्न कर रहे हैं ? भाषाई क्षेत्रीय संरचना इसलिए बनाई गई, क्योंकि देश में अनेक भाषाएं हैं । लडाई झगडा करने की आवश्यकता नहीं है, किन्तु यदि कोई नहीं सुन रहा है, तो उसकी कनपटी लाल कर दो । उसका वीडियो मत बनाओ । मराठी की सीख हमारे जीवन की प्रथम सीख थी ।
— MNS Adhikrut – मनसे अधिकृत (@mnsadhikrut) July 5, 2025
कार्यक्रम से पूर्व के छाया चित्र
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