Jagannath Rath Yatra : जगन्नाथपुरी स्थित विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा में १० लाख भक्तों की उपस्थिति

  • कर्णावती, उदयपुर, वाराणसी, भाग्यनगर आदि नगरों में भी रथयात्रा की परंपरा।

  • कर्णावती की रथयात्रा में हाथी से छूटा नियंत्रण, वन विभाग ने किया नियंत्रित।

जगन्नाथपुरी में विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा में सम्मिलित भीड़

जगन्नाथपुरी (ओडिशा) – देशभर में २७ जून को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं चैतन्यमयी वातावरण में निकाली गई । विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथपुरी की रथयात्रा दोपहर ४ बजे आरंभ हुई ।

साथ ही कर्णावती, उदयपुर, वाराणसी, कोलकाता, भाग्यनगर आदी नगरों में भी रथयात्रा परंपरागत पद्धति से निकाली गई । कर्णावती में हुई रथयात्रा के समय गृहमंत्री अमित शाह भी सहभागी हुए थे । प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को इस निमित्त शुभकामनाएं दीं ।

जगन्नाथपुरी : 

यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा के रथ दोपहर ४ बजे खींचना आरंभ हुआ । उसके पहले दोपहर ३ बजे पुरी राजघराने के गजपति दिव्य सिंह देव ने परंपरानुसार रथ के अगला भाग सोने के झाडू से झाडने के उपरांत रथयात्रा का आरंभ हुआ ।

इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा के साथ अनुमानित ३ किमी अंतर पर स्थित गुंडीचा मंदिर में जाते हैं । यह उनके मौसी का घर है एवं वहां वे ९ दिन रहकर लौटते हैं । रथयात्रा में भाजपा के स्थानीय सांसद संबीत पात्रा भी सहभागी हुए हैं ।

कर्णावती :

यहां प्रातः ५ से ६ इस समय में भगवान जगन्नाथ की ३ मूर्तियां रथ पर विराजमान थीं । गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के हाथों रथ के सामने सोने का झाडू रखा गया । यह यात्रा रात्री ८ बजे तक जारी थी । रथयात्रा में सहभागी हुए एक हाथी का नियंत्रण छूटने की घटना हुई । उस समय वन विभाग के कर्मचारियों ने उसपर तुरंत नियंत्रण पा लिया।

उदयपुर :

दक्षिण राजस्थान के उदयपुर में भगवान जगन्नाथ ८० किलो चांदी से बनाए हुए रथ में विराजमान हुए । यहां की रथयात्रा ७-८ किलोमीटर लंबी होती है ।