नई दिल्ली – पाकिस्तान के साथ सिंधु जल बंटवारा समझौता स्थगित करने के उपरांत भारत ने बांग्लादेश के साथ हुए गंगा नदी जल बंटवारा समझौते पर फिर से विचार करना आरंभ कर दिया है । इस समझौते की समय-सीमा अगले वर्ष समाप्त हो रही है । यह समझौता समाप्त होने की संभावना है ।
१. विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि, बांग्लादेश के साथ गंगा जल बंटवारा समझौता ३० वर्षों के लिए बढाने का सरकार का विचार था; परंतु पहलगाम में हुए आक्रमण के पश्चात स्थिति परिवर्तित गई है । पहलगाम की घटना के उपरांत बांग्लादेश ने पाकिस्तान सरकार के साथ अधिक अच्छे संबंध स्थापित कर लिए । इस कारण भारत की चिंता बढ गई । उसी से भारत गंगा जल समझौते पर पुनर्विचार कर रहा है ।
२. मई माह में बांग्लादेश के अधिकारियों के साथ बैठक हुई । इस बैठक में भारत ने अपनी पानी की आवश्यकता के विषय में बांग्लादेश को स्पष्ट शब्दों में बता दिया है । सूत्रों के अनुसार, यदि गंगा जल समझौते की समय-सीमा बढाई भी जाती है, तो वह पहले की भांति दीर्घ अवधि के लिए नहीं होगी ।
समझौता कब हुआ था ?
भारत एवं बांग्लादेश के मध्य १२ दिसंबर १९९६ को ‘गंगा नदी जल समझौता’ हुआ था । तत्कालीन प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौडा एवं बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे । ३० वर्षों के लिए यह समझौता किया गया था ।

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