लोअर परेल स्थित ‘केदारेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट’ की भूमि पर अतिक्रमण !

अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई करने की ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री से की मांग

मुंबई – बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने लोअर परेल क्षेत्र में स्थित ‘केदारेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट’ की बहुमूल्य तथा ऐतिहासिक संपत्ति (सर्वे क्रमांक ३४७) को अवैध रूप से अपने नाम पर कर लिया है । ‘बांधकाम व्यवसायिक’ तथा ‘स्कायलार्क बिल्डर्स’ के सुधाकर शेट्टी ने ट्रस्ट की भूमि का सर्वेक्षण करने के नाम पर ट्रस्ट की संपत्ति पर अतिक्रमण किया है, ऐसी सूचना ट्रस्ट द्वारा जारी किए गए एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है ।

ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर इस प्रकरण में त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है, साथ ही महानगरपालिका के अधिकारियों तथा बिल्डर के विरुद्ध अपराध पंजीकृत कर उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है । यह मांग ट्रस्ट के विश्वस्त श्री राहुल चतुर्वेदी ने की है । इस गंभीर प्रकरण की शिकायत की प्रति केंद्र शासन को भी भेजी गई है ।

केदारेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के विश्वस्त श्री राहुल चतुर्वेदी ने कहा,

१. केदारेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना वर्ष १८२४ में हुई थी तथा इसका विधिवत पंजीकरण वर्ष २००७ में पूर्ण हुआ । ट्रस्ट के अनुसार, केदारेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट, हनुमान गली, फर्ग्युसन रोड, लोअर परेल, मुंबई–१३ स्थित ७ सहस्र ९४ वर्ग मीटर की समस्त भूमि का एकमात्र स्वामी है । संबंधित संपत्ति पर उनका विधिक अधिकार है तथा मुम्बई उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक २३ सितम्बर २०१५ को दिए गए आदेश द्वारा इस अधिकार को मान्यता दी गई है ।

२. आदेश में कहा गया है कि अंतिम निर्णय होने तक संबंधित संपत्ति का पंजीकरण नहीं किया जा सकता, साथ ही कोई भी परिवर्तन नहीं किया जा सकता; किन्तु इसके बावजूद इस आदेश का उल्लंघन करते हुए महानगरपालिका ने बिना किसी वैध विधिक दस्तावेज के संपत्ति को अपने नाम पर दर्ज कर लिया ।

३. इस प्रकरण पर उच्च न्यायालय में अपील लंबित है । महानगरपालिका ने ट्रस्ट को न तो कोई नोटिस दी, और न ही पक्ष प्रस्तुत करने का कोई अवसर दिया ।

४. ट्रस्ट का आरोप है कि इस सम्पूर्ण प्रकरण के पीछे कुछ प्रभावशाली राजनेता, वरिष्ठ अधिकारी एवं निर्माण क्षेत्र के व्यक्तियों का एक दबाव समूह कार्यरत है, जिसका उद्देश्य इस धार्मिक स्थल की भूमि पर अवैध रूप से अधिकार प्राप्त करना है ।

५. अगर इस प्रकरण में दोषी व्यक्तियों को स्थानीय पुलिस द्वारा सहायता प्रदान की गई हो, तो उन पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए ।

६. यह मात्र संपत्ति का विषय नहीं है, अपितु एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल की प्रतिष्ठा तथा समाज की धार्मिक भावना से भी संबंधित विषय है ।