धर्मांतरण के लिए ससुराल वालों द्वारा प्रताडित किए जाने पर गर्भवती हिन्दू महिला ने की आत्महत्या !

  • कुपवाड (सांगली) की घटना

  • पति, सास तथा ससुर को बंदी बनाया गया

ऋतुजान उर्फ गौरी सुकुमार राजगे

सांगली, १० जून (वार्ता) – ईसाई पंथ स्वीकार करने के लिए बलपूर्वक और बार-बार दबाव डालकर ससुराल वालों ने अमानवीय अत्याचार किए, जिसके कारण कुपवाड के यशवंतनगर में रहने वाली विवाहित गर्भवती महिला ने अपने निवास स्थान पर आत्महत्या कर ली । ऋतुजा उर्फ गौरी सुकुमार राजगे (आयु२८ वर्ष) इस महिला का नाम है । यह घटना ६ जून को घटी है । ऋतुजा के ससुराल वालों ने गला दबाकर हत्या की है, ऐसा आरोप रिश्तेदारों ने लगाया है । पुलिस ने इस प्रकरण में पति सुकुमार सुरेश राजगे (आयु २९ वर्ष), सास अलका सुरेश राजगे (आयु ४९ वर्ष) और ससुर सुरेश राजाराम राजगे (आयु ५३ वर्ष) के विरुद्ध प्रकरण प्रविष्ट कर उन्हें बंदी बनाया है । न्यायालय ने इन तीनों को ३ दिन की पुलिस कोठरी में भेज दिया है ।

ऋतुजा के पिता चंद्रकांत पाटील (निवासी गुंडेवाडी, तालुका मिरज) ने पुलिस थाने में दी गई शिकायत में कहा है कि,

१. धनगर समाज की ऋतुजा का विवाह यशवंतनगर निवासी सुकुमार राजगे नामक युवक से २४ मई २०२१ को मालगाव (तालुका मिरज) में हुआ था ।

२. सुकुमार सहित उसका परिवार ईसाई पंथ का अनुसरण, प्रार्थना और रीति-रिवाजों के अनुसार रहता था, यह ऋतुजा और उसके परिवार को विवाह तक ज्ञात नहीं था ।

३. जून २०२१ में सास अलका ने ऋतुजा को पहला वट पूर्णिमा का पर्व मनाने नहीं दिया ।

४. विवाह के उपरांत पहली दीपावली ससुराल वालों ने मनाने नहीं दी । ‘हमारे घर में दीपावली का पर्व नहीं मनाते । तुम हमारे साथ चर्च में प्रार्थना के लिए आया करो’, ऐसा बलप्रयोग सास, ससुर और पति ने किया ।

५. ऋतुजा पूर्व में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी । ससुराल जाने के उपरांत उसने प्रारंभ में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एम.पी.एस.सी. – महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन) की परीक्षा दी । उस परीक्षा में ऋतुजा को सफलता नहीं मिली । उसके उपरांत ससुराल वालों ने ऋतुजा को प्रतियोगी परीक्षाओं का अभ्यास भी नहीं करने दिया ।

६. विवाह के उपरांत पति, सास और ससुर ईसाई धर्मगुरुओं (पादरी) के कहने पर ऋतुजा पर ईसाई पंथ स्वीकार करने के लिए बार-बार दबाव डालने लगे; किंतु ऋतुजा ने ईसाई पंथ स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया था । इस क्रोध में पति, ससुर और सास ने गत ३ वर्षों से ऋतुजा का अमानवीय रूप से शारीरिक और मानसिक उत्पीडन किया । (‘भारत का ईसाईकरण’ यह ईसाई धर्मियों का धर्मांतरण कराने के पीछे मूल उद्देश्य है । इसी के लिए भारत में ईसाई मिशनरी और चर्च कार्यरत हैं । इसके विरुद्ध कोई भी सरकार कठोर कार्यवाई नहीं करती, यह हिन्दुओं के लिए लज्जास्पद है ! – संपादक)

७. फिर ऋतुजा गर्भवती हुई । उस समय ‘ईसाई पंथ के अनुसार ही गर्भसंस्कार करेंगे’, ऐसा दबाव भी उस पर डाला गया । इसपर सुकुमार ने उसे मारा भी ।

८. ऋतुजा की आत्महत्या से पूर्व उसके पिता ने ससुराल वालों को समझाने का भी प्रयत्न किया; किंतु निरंतर कष्ट और दबाव से तंग आकर उसने आत्महत्या कर ली ।

संपादकीय भूमिका 

  • धर्मांतरण के लिए ईसाई किसी व्यक्ति को आत्महत्या करने पर विवश करते हैं, यह ध्यान में रखते हुए राज्य में कठोर दंड का प्रावधान करने वाला धर्मांतरण विरोधी कानून आवश्यक है !
  • ऐसी घटनाओं पर धर्मनिरपेक्षतावादी, पुरोगामी (अधोगामी) मौन रहते हैं, यह ध्यान दें !