‘His Story Of Itihaas’ Movie : किसी भी आधिकारिक प्रतिबंध के बिना ही ‘हिस स्टोरी ऑफ इतिहास’ जैसे फिल्मो के प्रसारण को रोका जाता है

फिल्म इंडस्ट्री का हिन्दूविरोधी चेहरा उजागर करने वाली नीरज अत्री की पोस्ट

प्रखर हिंदुत्वनिष्ठ और लेखक नीरज अत्री (फ्रेम में)

नई दिल्ली – शालेय पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से भारतीय इतिहास के विकृतिकरण को लेकर बनी फिल्म ‘His Story of इतिहास’ कुछ दिन पूर्व ही प्रदर्शित हुई है । यह फिल्म प्रखर हिन्दूत्वनिष्ठ लेखक नीरज अत्री के जीवन पर आधारित है। चूँकि यह फिल्म स्थापित हिन्दूविरोधी तंत्र की असलियत दिखाती है, इसलिए इसका परोक्ष रूप से विरोध किया जा रहा है । ऐसा प्रतीत होता है कि इस फिल्म को सिनेमाघर तक पहुचंने ही नहीं दिया जा रहा है ।

इस संदर्भ में नीरज अत्री ने फिल्म इंडस्ट्री का हिन्दूद्वेषी स्वरूप उजागर करने वाली एक पोस्ट ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) के माध्यम से साझा की है । उन्होंने लिखा –
“किसी भी आधिकारिक प्रतिबंध के बिना, सिर्फ ‘माफिया’ की इकोसिस्टम के कारण ‘His Story of इतिहास’ जैसी फिल्मों का प्रदर्शन कैसे रोक दिया जाता है, यह समझिए ।”


अत्रीजी ने आगे लिखा –

१. क्या आपने कभी सोचा है कि जनता को झकझोरने वाला सत्य कहने वाली फिल्मों को सिनेमाघरों से कैसे बाहर कर दिया जाता है ?

२. यह है उनके विरुद्ध की जाने वाली प्रक्रिया –

अ. पहले शुक्रवार को फिल्म को केवल गिने-चुने शो दिए जाते हैं, वो भी दूर के क्षेत्रों में एवं ऐसे समय पर जैसे सुबह या दोपहर, जब अधिकांश लोग आ नहीं सकते ।

आ. शनिवार और रविवार को, जब लोगों के पास समय होता है, तब इन फिल्मों के शो समाप्त कर दिए जाते हैं । कारण बताया जाता है: “शुक्रवार को भीड कम थी ।”

इ. सोमवार से यदि निर्माता संघर्ष शुरू करता है, तो उसे फिर से कुछ शो दिए जाते हैं; लेकिन समय और स्थान ऐसे होते हैं जो आम दर्शकों के लिए सुविधाजनक नहीं होते ।

फ़िल्म के लेखक और निर्देशक मनप्रीत सिंह धामी की ‘X’ (पूर्वी ट्विटर) पर की गई पोस्ट देखें –

ई. पुनः शुक्रवार आने से पहले ही… उस फिल्म को शो की सूची से हटा दिया जाता है ।

उ. इस प्रक्रिया में, अपना मेहनत का पैसा लगाने वाला (ना कि दाऊद इब्राहिम गिरोह का पैसा) निर्माता अपनी जीविका का स्रोत खो देता है। यह एक सुनियोजित षड्यंत्र है ।

३. कोई भी आधिकारिक प्रतिबंध नहीं होता । ‘सेंसर बोर्ड’ की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती । केवल चतुराई से शान्तिपूर्वकता से आवाज दबा दी जाती है ।

४. किसी झूठी प्रचलित धारणाओं के प्रचलन का सत्य प्रदर्षित करने वाली फिल्म के प्रसारण को रोकने के लिए इसी प्रकार की व्यवस्था सक्रिय रहती है ।