मुख्यमंत्री के आदेशानुसार कार्रवाई में भारी पुलिस बल तैनात !

कोल्हापुर – प्रशासन ने ३१ मई प्रातःकाल से जिले के विशालगढ से अतिक्रमण हटाने का कार्य पुन: प्रारंभ कर दिया है । ऐतिहासिक विशालगढ गत कुछ महीनों से अतिक्रमण के विवाद में फंसा हुआ था । अंत में न्यायालय के निर्देशानुसार प्रशासन ने एक बार पुन: अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी है । प्रशासन ने किले की प्राचीन धरोहर को संरक्षित करने तथा कानून के अंतर्गत कार्रवाई करने के लिए कदम उठाए हैं ।

१. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कोल्हापुर जिलाधीश को ३१ मई से पहले किलों-दुर्गों को अतिक्रमण मुक्त करने’ का आदेश दिया था ।
२. वह समय सीमा अब समाप्त हो चुकी है । जिला प्रशासन ने पहले विशालगढ पर अतिक्रमण की समीक्षा की थी । कोल्हापुर पुलिस ने विशालगढ पर पुलिस सुरक्षा में वृद्धि कर दी है ।
३. गत वर्ष विशालगढ पर अतिक्रमण विरोधी अभियान में दंगे भडकने के अगले ही दिवस अर्थात १५ जुलाई से प्रशासन ने अतिक्रमण हटाना प्रारंभ कर दिया था । यह कार्रवाई ४ दिनों तक निरंतर चलती रही ।
४. इस कार्रवाई में प्रशासन ने किले से ९४ अतिक्रमण हटाए, जबकि नागरिकों ने १० अतिक्रमण स्वयं ही हटा दिए । जिला प्रशासन ने पूरे किले एवं दुर्ग में संचार बंदी घोषित कर दी थी ।
५. न्यायालय ने विशालगढ पर अतिक्रमण के संबंध में पुरातत्व विभाग का पक्ष सुना था एवं अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था ।
६. विशालगढ पर बडे प्रमाण में अनधिकृत निर्माण का परिवाद गत वर्ष अनेक समय उठाया था । ६४ लोगों ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
७. इसमें १४ अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है एवं १५ दिवसों की समय सीमा दी गई थी । उसके उपरांत , जिला प्रशासन ने जानकारी दी है कि, अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण हटाने में सहायता की जा रही है।
वास्तविक प्रकरण क्या है ?
विशालगढ पर अतिक्रमण के विषय पर जागरूकता बढाने के लिए, १४ मार्च, २०२१ को श्री महालक्ष्मी देवी की सूक्ष्म उपस्थिति में एवं ‘जय भवानी, जय शिवाजी’ के नारों के साथ ‘विशालगढ संरक्षण एवं अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई समिति’ का गठन किया गया था । १६ मार्च को, कार्रवाई समिति ने पहली बार कोल्हापुर में एक संवाददाता सम्मेलन करके इस विषय को उठाया । उस समय, कार्रवाई समिति के प्रवक्ता श्री सुनील घनवट ने पत्रकारों के समक्ष विशालगढ पर अतिक्रमण के प्रति पुरातत्व विभाग की अक्षम्य उपेक्षा, साथ ही मंदिरों एवं समाधियों की दयनीय स्थिति को प्रस्तुत किया एवं प्रश्न उठाया कि, ‘आखिर पुरातत्व विभाग जानबूझ कर धार्मिक कट्टरपंथियों के अतिक्रमण को कैसे अनदेखा कर रहा है?’ इसके उपरांत इस विषय को सभी लोगों के ध्यान में लाने के लिए १८ मार्च २०२१ को कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज चौक पर पुरातत्व विभाग के विरुद्ध ‘घण्टा बजाओ’ विरोध प्रदर्शन किया गया । उसके उपरांत गत ३ वर्षों से समिति ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपना, विधानसभा सत्र काल में विरोध प्रदर्शन करना, वन मंत्री को ज्ञापन देना, विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शन करना, स्थानीय स्थानों पर ज्ञापन देना आदि पद्धतियों से यह लडाई जारी रखी । पशु बलि के कारण किले की पवित्रता नष्ट होने की बात कही एवं समिति ने कुछ समय पूर्व इसका विरोध भी किया, जिसके फलस्वरूप ईद में वहां एक भी पशु की हत्या नहीं की गई ।
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