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मुंबई – महाराष्ट्र में इस वर्ष मानसून की ऋतु १५ दिन पूर्व प्रारंभ हो गई है एवं गत २४ घंटों से राज्य के विभिन्न भागों में भारी वर्षा हो रही है। २६ जनवरी की प्रात: मुंबई वासियों को सूर्य के दर्शन नहीं हुए। प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी मुंबई में भारी वर्षा के कारण सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। २५ मई की मध्य रात्रि को कोकण एवं मुंबई में तथा २६ मई को पुणे एवं सोलापुर में भारी वर्षा हुई। इस पृष्ठभूमि में, मुंबई पुलिस ने नागरिकों से आवाहन किया है कि वे संभावित हानि से बचने के लिए “केवल आवश्यक होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें”। मुंबई एवं रायगढ जिले मध्यान्ह १२ बजे तक अतिदक्षता की चेतावनी पर थे। पालघर, ठाणे, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग एवं कोल्हापुर में ‘ऑरेंज अलर्ट’ (प्राकृतिक आपदा चेतावनी) प्रसारित की गई थी।
पुणे-सोलापुर राजमार्ग जलमग्न हो गया। गत २४ घंटों में राज्य में सबसे अधिक वर्षा मुरुद (रायगढ) में ३७१ मि.मी. हुई। वेधशाला ने बताया कि राज्य में इतनी प्रचंड वर्षा अरब सागर में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण हुई। राज्य में ग्रीष्मकालीन फसलें वर्षा से प्रभावित हुई हैं। ६९ वर्षों के उपरांत मानसून का मौसम मई में ही प्रारंभ हो गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक पत्रकार वार्ता आयोजित कर कहा कि वर्षा से उत्पन्न स्थिति नियंत्रण में है। आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने राज्य में आपातकालीन स्थिति की समीक्षा की है।
मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस भी आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के संपर्क में हैं एवं राज्य में वर्षा की स्थिति की निरंतर समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने विभिन्न प्रशासनिक विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने क्षतिग्रस्त क्षेत्रों का तत्काल सर्वेक्षण कराने का भी आदेश दिया है।
हवाई, रेल एवं भूमार्ग परिवहन प्रणालियां ध्वस्त !
भायखला से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस तक रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाने के कारण मध्य रेलवे ने सुरक्षा कारणों से कुर्ला, दादर एवं परेल जाने वाली कुछ रेलगाडियों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था, इसके उपरांत भी मध्य एवं हार्बर लाइन पर गाडियां लंबे समय तक १५ से २० मिनट विलंब से चल रही थीं। इससे भूमार्ग परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ रेलवे भी प्रभावित हुआ। हार्बर लाइन से लेकर मस्जिद बंदर एवं करी रोड रेलवे स्थानकों तक पटरियों पर पानी जमा हो गया था। वर्षा से हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुईं। विमानन प्रतिष्ठानों ने यात्रियों को आवश्यक निर्देश जारी किए।
भूमिगत मेट्रो स्थानक में पानी !
भारी वर्षा के कारण भूमिगत मेट्रो ३ लाइन पर आचार्य अत्रे एवं वर्ली मेट्रो स्थानकों पर पानी भर जाने से यात्री अटक गए। सीढियों से पानी बहने से स्थानक झील में बदल गया। पानी के कारण गाडी के पट बंद कर दिए गए एवं यात्रियों को उतरने नहीं दिया गया। मेट्रो उन्हें स्थानक के दूसरी ओर ले गई एवं तदनंतर यात्रियों को उतारा गया । स्थानक के ऊपरी तल कीचड से भर गए । पानी के साथ प्लास्टिक कचरा भी स्थानक पर आ गया।
भारी भीड, यात्रियों की दुर्दशा !
भारी वर्षा के होने पर भी लोग कूडा डालने के लिए अपने घरों से बाहर निकल आए। ठाणे, दिवा एवं मुंब्रा स्थानकों पर यात्रियों की भारी भीड थी। ठाणे, डोंबिवली एवं कल्याण के यात्रियों को बहुत कष्ट हुए। चूंकि गाडियों को प्लेटफार्म संख्या १ व ६ से रवाना होने की अनुमति नहीं दी जा रही थी , इसलिए प्लेटफार्म क्र. ४ पर बहुत अधिक भीड होने के कारण स्थानकों व गाडियों में लोगों के बीच कहासुनी की घटनाएं हुईं।
सार्वजनिक जीवन बाधित !
मुंबई एवं पुणे के साथ-साथ अन्य नगरों एवं गांवों में भी कुछ मार्ग जलमग्न हो गए। यातायात धीमा हो गया क्योंकि वाहनों का चलना कठिन हो गया था। नागरिकों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाई हो रही थी।
| अगले तीन दिनों तक भारी वर्षा होगी !
आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने नागरिकों से पर्यटन, यात्रा आदि के लिए बाहर न निकलने का आवाहन किया है, क्योंकि राज्य में अगले तीन दिनों तक भारी वर्षा होने की संभावना है। भारत अब मौसम पूर्वानुमान में भी आत्मनिर्भर होगा ! अगले कुछ घंटों तक कोंकण एवं पश्चिमी महाराष्ट्र में वर्षा जारी रहेगी। मौसम विभाग ने अगले ५ दिनों में पूरे राज्य में मौसमी वर्षा की संभावना जताई है। अब जबकि भारत ने अपनी स्वयं की मौसम पूर्वानुमान प्रणाली विकसित कर ली है, तो आशा है कि भारत पूर्वानुमान प्रणाली (बीएफएस) सटीक पूर्वानुमान देने में सक्षम होगी। राज्य भर में भारी वर्षा का परिणाम ! आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि सभी संभागीय आयुक्तों, जिला कलेक्टरों एवं नगर निगम आयुक्तों को आवश्यक उपाय करने एवं भारी वर्षा के कारण राज्य में उत्पन्न स्थिति से निपटने के आदेश जारी किए गए हैं। मुंबई २६ मई की मध्य रात्रि से दक्षिण एवं मध्य मुंबई तथा उसके उपनगरों में भयंकर तूफान के साथ भारी वर्षा हुई। सबसे अधिक २५२ मिलीमीटर वर्षा नरीमन प्वाइंट पर देखी की गई। चर्चगेट एवं मंत्रालय क्षेत्रों में कभी भी पानी जमा नहीं होता; किन्तु यहां भी पानी एकत्रित हो गया था। के.ई.एम. चिकित्सालय में पानी घुसने से बीमार लोगों को कष्ट उठाना पडा। मालाबार हिल के पास चेम्स कॉर्नर एवं मुकेश चौक के बीच भूमार्ग बंद कर दिया गया था । इसलिए, बेस्ट बसों को अपना मार्ग बदलना पडा। चर्चगेट-मरीन लाइन्स स्थानकों के बीच शॉर्ट सर्किट के स्फोट हुआ। डब्बावालों की सेवाएं प्रभावित हुईं। २६ जुलाई २००५ को ९४४ मि.मी. वर्षा के कारण आपदा आई थी, जिसमें १,०९४ लोगों की मृत्यु हो गई थी। नवी मुंबई भारी वर्षा के कारण सीबीडी, सेक्टर ५,६ एवं ७ में पानी एकत्रित हो गया था। सीबीडी का पानी सेक्टर १२ स्थित पंपिंग कक्ष से पंप करके खाडी में छोडा जा रहा है। सीबीडी में सहस्रों दुकानें पानी से क्षतिग्रस्त हो गईं। नागरिक नगर निगम के अधिकारियों को इसके लिए उत्तरदायी ठहराते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे थे। रायगढ जिले के मुरुड, श्रीवर्धन एवं म्हसाला तालुका में ३०० मि.मी. से अधिक वर्षा हुई। कुंडलिका, पातालगंगा, अंबा एवं सावित्री नदियों का जलस्तर बढ गया। रायगढ जाने वाले भूमार्ग पर कोझर में बडा भूस्खलन हुआ। पुणे जिले के आपदा विभाग को सतर्क कर दिया गया है एवं कई स्थानों पर सहायता उपलब्ध करायी गयी। जिले को अगले ४ दिनों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ दिया गया है। सोलापुर में भारी वर्षा के कारण पुणे-सोलापुर राजमार्ग नदी में बदल गया है। बडे-बडे वृक्ष गिर गये हैं। भारी वर्षा के कारण बारामती एवं फलटण में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के जवानों को तैनात किया गया है। उन्होंने नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। |


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