पाक की सेना की स्वीकृति

इस्लामाबाद (पाकिस्तान) – पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्वीकार किया कि पाकिस्तानी सेना के प्रशिक्षण में जिहाद भी सम्मिलित है । उनसे जब भारत के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान को ‘बुन्यान उल मारसूस’ (लोहे की मजबूत दीवार) नाम देने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने यह बात कही ।
लेफ्टिनेंट अहमद ने कहा कि पाकिस्तान की वायुसेना तथा थलसेना के प्रशिक्षण में इस्लामी मूल्यों को सम्मिलित किया गया है। ‘ईमान’, ‘तकवा’ तथा ‘जिहाद’ (श्रद्धा, एकता और अनुशासन) को पाक सेना की नींव माना जाता है । सेना प्रमुख असीम मुनीर भी कठोर इस्लामिक विचारधारा के अनुयायी हैं तथा इसका प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है । ऐसे में इस अभियान को ‘बुन्यान उल मारसूस’ नाम देना स्वाभाविक है। इसका अर्थ है – अल्लाह के मार्ग में लड़ने वाले लोग लोहे की दीवार की भांति कठोर होते हैं । पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जिया उल हक ने सेना के इस्लामीकरण में बड़ा योगदान दिया था ।
संपादकीय भूमिका –
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