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नागपुर – नागपुर संभाग के शिक्षा उपसंचालक उल्हास नारद को ११ अप्रैल की रात गढ़चिरौली में बंदी बनाया गया । उन पर झूठे ककागदपत्रों के आधार पर बिना शिक्षण अनुभव वाले व्यक्ति को मुख्याध्यापक नियुक्त करने का आरोप है ।
पुलिस ने इस प्रकरण में भंडारा जिले के लाखनी तालुका के जेवताला के मुख्याध्यापक पराग पुडके को भी हिरासत में लिया है । शिक्षक के रूप में कोई अनुभव नहीं होते हुए भी, नारद ने झूठे कागदपत्रों के आधार पर पुडके को सीधे मुख्याध्यापक नियुक्त कर दिया ।
नागपुर शिक्षा विभाग के वेतन एवं भविष्य निधि अधीक्षक निलंबित !उन्हें निलंबित नहीं, अपितु निष्कासित किया जाना चाहिए ! यहां वर्ष २०१९ से फर्जी प्राथमिक शिक्षक तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति की जा रही है । वर्तमान में जिले में अनुमानित ५८० झूठे कर्मचारियों को वेतन दिया गया है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया है । इस घोटाले का उजागर शालार्थ पोर्टल पर त्रुटियों की ऑडिट के समय हुआ । इस प्रकरण में नागपुर शिक्षा विभाग के वेतन एवं भविष्य निधि अधीक्षक नीलेश वाघमारे को निलंबित कर दिया गया है । यह कार्रवाई शिक्षा उपसचिव की अध्यक्षता में नियुक्त जांच समिति के ब्यौरे के उपरांत की गई । इस घोटाले में कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हैं तथा उनके विरुद्ध भी शीघ्र ही कार्रवाई की जाएगी । |
संपादकीय भूमिकायह विचार नहीं किया तो अच्छा होगा कि ऐसे विद्यालय कैसे चलते हैं, जहां मुख्याध्यापक की नियुक्ति भी पारदर्शकता से नहीं होती ! सरकार को छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करनेवालों को कारागृह में डालकर दंडित करना चाहिए ! |
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