कोईम्बतूर में एक सौ वर्ष पुराने ‘मरियम्मन’ मंदिर के समीप गिरजाघर के निर्माण पर अंतरिम स्थगन दिया गया !

चेन्नई (तमिलनाडु) — मद्रास उच्च न्यायालय ने कोईम्बतूर में उपस्थित एक सौ वर्ष पुराने ‘मरियम्मन’ मंदिर के समीप प्रस्तावित गिरजाघर के निर्माण पर अंतरिम रोक लगा दी है । न्यायालय ने कहा कि “मंदिर के परिसर में बडे गिरजाघर का प्रस्ताव रखने के पीछे ’दुर्भावना’ नहीं है” – यह पूर्णरूप से नकारा नहीं जा सकता, ऐसा निरीक्षण में लिखा । न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन एवं न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने बालसुब्रह्मण्यन ए. (कोईम्बतूर के कालापट्टी क्षेत्र के निवासी) द्वारा दायर याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया ।
🚨 Sentiments of Hindus Cannot Be Ignored! 🚩
"If the majority Hindus oppose the construction of a church next to a temple, the administration must listen to them!" – Madras High Court ⚖️
The Court has granted an interim stay on the proposed church construction near the… pic.twitter.com/jDJoXSlcrI
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) June 18, 2026
न्यायालय द्वारा किए गए प्रमुख निरीक्षण बिंदु
१. कोईम्बतूर धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील नगर है । यहां पहले भी बम स्फोट एवं सांप्रदायिक दंगे हुए हैं । प्रस्तावित गिरजाघर वर्तमान मरियम्मन मंदिर से बहुत समीप स्थित होगा । इस क्षेत्र में ईसाई परिवारों की संख्या अत्यंत अल्प है । ऐसे स्थान पर बडे गिरजाघरके निर्माण का प्रस्ताव होने पर यह कहना कठिन है कि इसके पीछे द्वेषपूर्ण उद्देश नहीं है ।
२. स्थानीय क्षेत्र में हिन्दू बहुसंख्यक हैं एवं उन्होंने मंदिर के समीप गिरजाघर के निर्माण का भीषण विरोध किया है । जब स्थानीय बहुसंख्यक समुदाय मंदिर के समीप गिरजाघर के निर्माण का कठोरता से विरोध कर रहा हो, तो प्रशासन इस विरोध की अनदेखी नहीं कर सकता ।
३. भारतीय संविधान का अनुच्छेद २५ धार्मिक आचार-व्यवहार एवं धर्म के प्रचार का अधिकार देता है; पर यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था के अधीन है । यदि वैधानिक रूप से अधिकार सिद्ध हो जाता है या विरोध आधारहीन पाया जाता है, तो सरकार उस अधिकार की पुष्टि के लिए आवश्यक कदम उठा सकती है ।
४. इस प्रकरण में खंडपीठ को प्रारम्भिक रूप से यह सूचित करने के लिए पर्याप्त कारण मिले, जिनके आधार पर गिरजाघर के निर्माण को रोका जाना चाहिए । यदि अंतरिम आदेश नहीं दिया गया तो सामाजिक शांति को अपरिमेय क्षति पहुंच सकती है ।
५. राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं; परंतु जब तक कानून की स्थिति विद्यमान है, उसका अनुपालन कराना हमारा कर्तव्य है ।
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