मुंबई – मुंबई उच्च न्यायालय ने ‘केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल’ के (‘सीपीसीबी’ के) १२ मई २०२० को सुधारित मार्गदर्शक तत्त्वों के अनुसार इससे आगे ‘पीओपी’ मूर्तियों पर प्रतिबंध की कठोर कार्यवाही करें’, ऐसा आदेश राज्य सरकार, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एम.पी.सी.बी.), साथ ही राज्यभर की नगरनिगम एवं जिलाधिकारी को दिया । जनहित याचिकाकर्ता रोहित जोशी ने ‘माघ माह के गणेशोत्सव में पीओपी मूर्तियों का ही विक्रय हो रहा है’, ऐसी जनहित याचिका प्रविष्ट की थी । उसपर न्यायालय ने यह निर्णय दिया है । ‘सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिबंध स्थायी है’, ऐसा अधिवक्ता रोनिता ने इस समय उच्च न्यायालय को निदर्शन दिया हैं । याचिका पर आगे की सुनवाई २० मार्च को होगी ।
केंद्रीय प्रदूषण मंडल की सुधारित मार्गदर्शक तत्त्वों के नियम २ अनुसार मूर्तिकारों को पीओपी के आधार पर मूर्ति का निर्माण करना, साथ ही ऐसी मूर्ति का विसर्जन करने हेतु पूर्णतः प्रतिबंध है । इसपर मूर्तिकारों ने याचिकाएं प्रविष्ट की थीं । मुंबई उच्च न्यायालय के साथ ही अनेक उच्च न्यायालयों ने उन्हें अस्वीकार कर दिया । सर्वोच्च न्यायालय के ३ न्यायमूर्तियों के पीठ ने १८ सितंबर २०२३ को इस संदर्भ में याचिकाएं अस्वीकार कर दी थीं ।

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