अध्यात्मशास्त्र के आधार से भारत कैसे हिन्दू राष्ट्र बन सकता है ?, यह जान लेने हेतु सनातन संस्था की प्रदर्शनी !

  • श्रद्धालुओं को कुंभपर्व में सनातन धर्म को सरल भाषा में समझ लेने का अमूल्य अवसर !

  • प्रयागराज के महाकुंभपर्व में ‘सनातन संस्कृति प्रदर्शन’का आयोजन !

बाईं ओर से श्रीमती धनश्री केळशीकर, बात करते हुए श्री. चेतन राजहंस बोलतांना एवं श्री. संजय सिंह

प्रयागराज, १५ जनवरी (संवाददाता) : प्रयागराज के महाकुंभपर्व में सनातन धर्म, संस्कृति एवं परंपराओं का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक आधार समझानेवाली ‘सनातन संस्कृति प्रदर्शनी’ लगाई गई है । इस प्रदर्शनी से ‘भारत अध्यात्मशास्त्र के आधार से कैसे हिन्दू राष्ट्र बन सकता है ?’, इसका उत्तर मिलेगा । यह प्रदर्शनी १२ जनवरी से १५ फरवरी की अवधि में सनातन संस्था शिविर, सेक्टर ९, गंगेश्वर महादेव मार्ग, प्रयागराज में सवेरे ९ बजे से रात ९ बजे तक चलती रहेगी । महाकुंभ मेंअ आनेवाले श्रद्धालु सनातन धर्म के विषय में सरल भाषा में जानकारी देनेवाली इस प्रदर्शनी का अवलोकन करें, ऐसा आवाहन सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने १५ जनवरी को की गई पत्रकार वार्ता में किया है ।

श्री. राजहंस ने आगे कहा, ‘‘कुंभपर्व करोडों श्रध्दालुओं की भक्ति का महामेला है; परंतु अनेक हिन्दुओं को सनातन धर्म, संस्कृति एवं परंपराओं के शास्त्र की जानकारी न होने के कारण उन्हें इस कुंभपर्व का अपेक्षित आध्यात्मिक लाभ नहीं मिलता । वर्तमान में काँन्वेंट विद्यालयों में बाईबिल तथा मदरसों में कुरआन सिखाया जाता है; परंतु देश में सामान्य हिन्दुओं के लिए उनके धर्म के विषय में जानकारी देनेवाली कोई भी व्यवस्था नहीं है । इसके कारण ‘सनातन धर्म क्या है ?’, ‘धर्माचरण कैसे करना चाहिए ?’, यह हिन्दुओं को ज्ञात नहीं है । धार्मिक कृति श्रद्धापूर्वक तथा उचित ढंग से की, तो उसका अधिक आध्यात्मिक लाभ होता है, साथ ही भारत एक स्वाभाविक हिन्दू राष्ट्र आहे. सनातन धर्मियों की हिन्दू राष्ट्र की कल्पना विश्वकल्याण हेतु है । हिन्दू राष्ट्र का मूल लक्ष्य ही विश्वशांति है, इस उद्देश्य से ‘सनातन संस्कृति प्रदर्शनी’का आयोजन किया गया है ।’’

प्रदर्शनी की विशेषताएं : ‘तीर्थमहिमा कक्ष’ एवं ‘हिन्दू राष्ट्र बोध कक्ष’ !

सनातन के साधक श्री. संजय सिंह ने इस प्रदर्शनी की विशेषताएं स्पष्ट करते हुए कहा कि सनातन संस्था वर्ष २००१ के कुंभपर्व से निरंतर ऐसी प्रदर्शनियों के माध्यम से जनजागरण कर रही है । ‘तीर्थमहिमा’ एवं ‘हिन्दू राष्ट्र बोध’ इन दो स्वतंत्र कक्षों के द्वारा श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया जाएगा । ‘तीर्थमहिमा कक्ष’: यहां २ श्राद्धस्थल, ३ त्रिस्थली यात्रा के स्थान, ४ कुंभक्षेत्रों तथा ७ मोक्षपुरियों की महत्त्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी । ‘हिन्दू राष्ट्र बोध कक्ष’में हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना के विषय में उत्पन्न होनेवाले अाक्षेप तथा उनके शास्त्रशुद्ध उत्तर दिए जाएंगे ।

ग्रंथ प्रदर्शनी एवं जानकारी पुस्तिकाओं का समावेश !

सनातन धर्म, अध्यात्म, साधना एवं राष्ट्रहित इन पर आधारित सनातन संस्था के ग्रंथों की प्रदर्शनी यहां होगी । श्रद्धालुओं को धर्मशास्त्र समझाने हेतु विशेष ग्रंथ, फलक एवं वीडियोज के माध्यम से जानकारी दी जाएगी । सनातन की साधिका श्रीमती धनश्री केळशीकर ने बताया कि श्रद्धालुओं को सनातन धर्म का महत्त्व, उसका आध्यात्मिक लाभ तथा परंपराओं का वैज्ञानिक आधार समझ लेने हेतु यह प्रदर्शनी उपयुक्त सिद्ध होगी । श्रद्धालु इस प्रदर्शनी का अवलोकन कर इसका लाभ उठाएं ।

प्रयागराज में मार्च के महिने से सनातन के धर्मशिक्षावर्ग आरंभ किए जाएंगे !

पत्रकार वार्ता में उपस्थित पत्रकार

पत्रकारों के प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री. राजहंस ने कहा कि प्रयागराज में सनातन का केंद्र होना चाहिए, यह अनेक जिज्ञासुओं की मांग है तथा उस दृष्टि से प्रयागराज में मार्च के महिने से सनातन के धर्मशिक्षावर्ग आरंभ किए जाएंगे । इससे अधिवक्ताओं तथा हिन्दुत्वनिष्ठों का संगठन किया जाएगा । विगत ७५ वर्षाें में सनातन धर्म की बदनामी की गई है । अतः सनातन पुराना विषय है, ऐसा कथानक (नैरेटिव) समाज में फैलाया गया । वास्तव में सनातन शाश्वत एवं नित्यनूतन है ।