
पुणे, १४ दिसंबर (वार्ता) : परिपूर्ण सेवा करने वाले और सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले के सतत अनुसंधान में रहने वाले, आनंदी, स्थिर और प्रेमभाव को स्थायी भाव में धारण करने वाले, पुणे के सनातन संस्था के १२५ वें संत पू. अरविंद सहस्त्रबुद्धे (आयु ७७ वर्ष) ने १४ दिसंबर, दत्त जयंती के दिन प्रातः ३:३९ बजे देहत्याग किया। अल्प समय से बीमार होने के कारण वे रुग्णावस्था में थे।उनके पश्चात पत्नी श्रीमती मंगला सहस्त्रबुद्धे, एक बेटी, दामाद और दो नाती-पोते ऐसे परिवारजन हैं।
देहत्याग के पश्चात पू. काका का मुखमंडल अत्यंत तेजस्वी दिखाई दे रहा था। वातावरण में भी अधिक चैतन्य और शांति का अनुभव हो रहा था। उनके देहत्याग के समय उनके परिवारजन, सनातन संस्था की संत पू. (सौ.) मनीषा पाठक और संस्था के कई साधक उपस्थित थे।
१. आध्यात्मिक प्रगति:
पू. काका, जो हमेशा आनंदी रहते थे, ने वर्ष २०१३ में ६१ % आध्यात्मिक स्तर प्राप्त किया था। ६ जुलाई २०२३ को पू. अरविंद सहस्त्रबुद्धे संतपद पर विराजमान हुए।
२. पत्नी का योगदान:
पू. काका की पत्नी श्रीमती मंगला सहस्त्रबुद्धे भी सनातन के मार्गदर्शन में साधना कर रही हैं और उन्होंने ६७ % आध्यात्मिक स्तर प्राप्त किया है।
३. सेवा का समर्पण:
पू. काका पिछले १७ वर्षों से साप्ताहिक ‘सनातन प्रभात’ के लिए निरंतर सेवा कर रहे थे। उनके घर पर पहले कई संत और साधक ठहरे हैं। काका और काकू के प्रेमभाव के कारण वे साधकों का स्वागत और सत्कार बहुत आत्मीयता से करते थे।
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