
राजस्थान – फरवरी में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राजस्थान के अजमेर और कोटा शहर में दौरा किया । इस समय उनके मार्गदर्शन का आयोजन विभिन्न जगहों पर किया गया । उसका संक्षिप्त वृत्तांत…
अवतारों के जन्मोत्सव तिथि पर मनाए जाते हैं, उसी प्रकार हमें भी अपना जन्मदिन तिथि पर मनाना चाहिए ! – सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी

लाडपुरा (कोटा, राजस्थान) – अरंडखेडा गांव स्थित मंशापूर्ण हनुमान मंदिर प्रांगण में हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा धर्म बैठक का आयोजन किया गया । कोटा के वरिष्ठ अध्यापक एवं समिति के सदस्य कुंज बिहारी शर्मा ने सद्गुरु डॉ. पिंगळेजी का सत्कार किया ।
अपने उद्बोधन में सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने कहा, ‘भगवान के अवतारों के जन्मोत्सव तिथि अनुसार मनाए जाते हैं, उसी प्रकार प्रत्येक सनातनी को भी अपना जन्मदिन तिथि के अनुसार मनाना चाहिए ।’ उन्होंने कहा कि ‘हिन्दू धर्म के १६ संस्कार एवं पर्व-त्योहार शास्त्रीय महत्त्व से जुडे हैं, जिन्हें समझकर आचरण में लाने से जीवन में सुख-शांति आती है तथा समाज की अनेक कुरीतियां समाप्त होती हैं ।’
इसके पश्चात समिति के समन्वयक आनंद जाखोटिया ने कहा कि ‘सनातन धर्म की प्रत्येक परंपरा शास्त्र एवं विज्ञान पर आधारित है । यदि इन्हें समझकर अपनाया जाए, तो शरीर, मन एवं जीवन से जुडी अनेक समस्याओं का समाधान संभव है ।
इस अवसर पर गांव के पूर्व सरपंच सर्वश्री ललितेश शर्मा, मेघराज सेन, पवन, देवीशंकर सुमन, बजरंग दल संयोजक बबलू सुमन, गिरिराज प्रसाद सहित अनेक ग्रामीणजन उपस्थित थे ।
हिन्दू जनजागृति समिति के धर्मशिक्षा अभियान का सनातन धर्म मंदिर से प्रारंभ : धर्मशिक्षा फलक का अनावरण
कोटा (राजस्थान) – यहां हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की उपस्थिति में सनातन धर्म मंदिर परिसर में ‘मंदिर धर्मशिक्षा फलक’ का विधिवत अनावरण कर अभियान का प्रारंभ किया गया ।
सद्गुरु डॉ. पिंगळेजी ने बताया कि ‘इस अभियान का उद्देश्य है मंदिरों को धर्मशिक्षा एवं संस्कार के केंद्र के रूप में विकसित करना तथा श्रद्धालुओं को शास्त्रसम्मत आचरण एवं भावपूर्ण दर्शन की जानकारी देना । वर्तमान में समाज को धर्मशिक्षा की अत्यंत आवश्यकता है, जिससे श्रद्धालु मंदिर में आचरण, दर्शन पद्धति और धार्मिक कर्तव्यों का सही ज्ञान प्राप्त कर सकें । विशेष रूप से युवा पीढी को यह विज्ञान ज्ञात होने से वे आस्थापूर्वक मंदिर दर्शन का पूर्ण लाभ ले सकेंगे ।’
सनातन धर्म मंदिर के अध्यक्ष किशनलाल काबरा ने कहा, ‘इस धर्मशिक्षा फलक के माध्यम से श्रद्धालु मंदिर दर्शन का पूर्ण लाभ ले पा रहे हैं ।’ उन्होंने सभी मंदिरों से इस अभियान से जुडने का आवाहन किया ।
कार्यक्रम में रघुवीर सिंह मेहरा, गोपाल काबरा सहित मंदिर समिति के पदाधिकारी एवं हिन्दू जनजागृति समिति के विष्णुकांत शर्मा उपस्थित रहे । अंत में उपस्थितों ने मंदिरों को धर्मशिक्षा के केंद्र बनाने हेतु निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया ।
महाराष्ट्रीय समाज के पदाधिकारियों से वार्तालाप
कोटा – यहां के गणेश मंदिर, जंक्शन में महाराष्ट्रीय समाज के पदाधिकारियों को प्रबोधन मे सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने महाराष्ट्रीय समाज के पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘समाज के लिए कार्य करते समय अनेक चुनौतियों का सामना करना पडता है । सकारात्मक विचार और श्रेष्ठ कार्यों का आरंभ अपने घर और समाज से करना होता है, इसलिए संघर्ष स्वाभाविक है ।’
कार्यक्रम में महाराष्ट्रीय समाज के अध्यक्ष अनिल खांडेकर, सचिव भावना काळे, सहसचिव अमोल चावरेकर, दीपक पटवर्धन के साथ अन्य पदाधिकारी बडी संख्या में उपस्थित रहे ।
श्रीराम मंदिर में धर्म-संस्कृति पर व्याख्यान
कोटा – आज यहां के १०० वर्ष प्राचीन श्रीराम मंदिर में धर्म एवं संस्कृति विषय पर एक विशेष व्याख्यान संपन्न हुआ । इस अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने कहा, ‘श्रीमद्भगवद्गीता के पठन, मनन, चिंतन से आगे जाकर हमें आचरण करना होगा । गीता हमें नामजप साधना के विषय में, अपने भीतर के अहंकार और दोष निर्मूलन का संदेश देती है । उसे जीवन में उतारना, वास्तविक सनातनी बनने का और जीवन सफल बनाने का मार्ग है ।’
इस अवसर पर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं गीता परिवार के डॉ. सुधीर उपाध्याय, महामंत्री परमानंद शर्मा, श्रीराम धर्मार्थसेवा समिति के उपाध्यक्ष प्रताप भान सिंह, सभापति महेश चंद्र वर्मा, श्रीराम मंदिर संध्याकाल महिला मंडल की सदस्या उपस्थित थीं ।
इस समय श्रीराम मंदिर अध्यक्ष डॉ. सुधीर उपाध्याय ने भी गीता का महत्त्व और गीता हर घर में क्यों आवश्यक है, इस पर प्रकाश डाला । उन्होंने बताया कि ‘भगवान ने हमें विवेक और कर्म की स्वतंत्रता दी है । इसका उपयोग कर हम हमारा उन्नति या पतन का कारण बन सकते हैं । विवेक जागृत होने के लिए हमें गीता से जुडना चाहिए ।’
तनाव-निर्मूलन संबंधी मार्गदर्शन !
कोटा – यहां के श्रीराम पब्लिक स्कूल में मार्गदर्शन करते हुए सद्गुरु डॉ. पिंगळेजी ने कहा, ‘अध्यापक छात्रों के माध्यम से सशक्त समाज का निर्माण करता है । हमें तनावमुक्त रहने की सीख अध्यात्म द्वारा मिलती है । इसलिए स्वयं के दोषों के निवारण के साथ अध्यापकों का साधना करना, भावी समाज निर्माण हेतु आवश्यक है ।’ इस समय स्कूल के संचालक श्री. अनिल गौड, श्री. विष्णुकांत शर्मा उपस्थित थे ।
हिन्दू धर्म का तत्त्वज्ञान आचार, विचार एवं संस्कार में उतारना ही सच्चा हिन्दुत्व है ! – सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी

अजमेर – ‘हमें दीर्घ काल से एक गलत ‘नैरेटिव’ में फंसाया गया है । ‘घर का भेदी लंका ढाए’ जैसी कहावत को विश्वासघात के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि लंकादहन घर का नहीं, अधर्म का दहन था । हमें गलत ‘नैरेटिव’ से बाहर निकलकर सनातन मूल्यों को अपनाना होगा । हिन्दू धर्म का तत्त्वज्ञान आचार, विचार और संस्कार में उतारना ही सच्चा हिन्दुत्व है’, ऐसा प्रतिपादन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सदगुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने किया ।
कोटा और अजमेर यात्रा के दौरान हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं के लिए सद्गुरु डॉ. पिंगळेजी के मार्गदर्शन का आयोजन किया गया था । कोटा शहर में चंबल गार्डन के पास गौरांग बालाजी मंदिर में वानर सेना द्वारा तथा अजमेर शहर के शालिग्राम मंदिर में आदेश सेवा समिति के कार्यकर्ताओं के लिए यह मार्गदर्शन हुआ । लगभग १८० से अधिक कार्यकर्ताओं ने इसका मार्गदर्शन लिया ।
कोटा में वानर सेना अध्यक्ष गजेंद्र भार्गव, अजमेर में आदेश सेवा समिति के सेवक मोनू सेन द्वारा यह आयोजन किया गया ।
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