हवन सामग्री के लिए अजमेर (राजस्थान) के महाविद्यालय ने लिया पेटंट

अजमेर (राजस्थान) – ‘इंडियन काऊंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (आइ.सी.एम.आर.) द्वारा ‘हवन’ पर शोध करने के उपरांत हवन आदि से संबंधित सामग्री के लिए ‘पेटंट’ भी लिया है । अजमेर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सकीय महाविद्यालय के सूक्ष्मजीवशास्त्र विभाग द्वारा ‘हवन औषधि धुएं का विषाणु पर परिणाम’ इस विषय पर पहली बार शोध किया गया । विभाग की प्रमुख डॉ. विजयलता रस्तोगी ने कहा कि हवन सामग्री एवं औषधियों का पेटंट मिला है । विषाणु के कारण उत्पन्न होनेवाले रोग मिटाने के लिए ‘हवन’ प्रभावशाली प्रमाणित हुआ है । अब इसपर सविस्तार शोधकार्य किया जाएगा ।

१. कुछ दिन पूर्व ‘हवन’ पर किए गए शोधकार्य से सामने आया है कि ‘हवन’ का धुआं एवं सुगंध विषाणुओं के कारण होने वाले रोगों पर रामवाण उपचार के रूप में काम करता है । ‘हवन’ की सामग्री एवं औषधि की सहायता से किए गए हवन के कारण आसपास के वातावरण के विषाणु नष्ट होते ही हैं, इसके अतिरिक्त व्यक्ति की रोगप्रतिकारक शक्ति भी बढती है ।
२. यज्ञ-उपचार यह भारत की एक अत्यंत प्राचीन चिकित्सकीय प्रणाली है । उसका वर्णन वेदों में मिलता है । यह सूक्ष्म स्वरूप में कार्य करती है । उसकी औषधियां शरीर में जाने से उसका अधिक परिणाम होता है । विशिष्ट मंत्रों के सामर्थ्य से औषधि सामग्री के साथ हवन करें, तो हवन का धुआं रंध्र, मुंह एवं नाक से देह में प्रवेश करता है । इस कारण लाभ होता है एवं बिमारी से मुक्ति मिलती है ।
३. आज भी तिब्बत में सर्दी, माइग्रेन, सरदर्द, अपस्मार, हृदय एवं फेफडों से संबंधित रोगों पर औषधि वनस्पतियों के धुएं द्वारा उपचार किए जाते हैं । यज्ञ के धुएं से घर का वातावरण शुद्ध होता है एवं मच्छरों के साथ हवा में फैलनेवाले ९० प्रतिशत जंतु नष्ट होते हैं । आज भी अनेक प्राचीन तीर्थक्षेत्रों में स्थित आश्रमों में प्रतिदिन यज्ञ किया जाता है ।
संपादकीय भूमिकाप्राचीन काल में ऋषि-मुनियों को इस विषय में गहन ज्ञान था । अब भारत में भी इस विषय में शोध हो रहा है, यह अच्छा ही है । सरकार को भी ऐसे शोधकार्यों को प्रोत्साहन देना आवश्यक ! |
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