२ वर्षों उपरांत भी कार्यवाही नहीं !

मुंबई, १७ मार्च (वार्ता.) – राज्य सरकार के गृह विभाग ने ७ अप्रैल, २०२२ के दिन ‘मद्यबिक्री करनेवाली कंपनियों को देवता, राष्ट्रपुरुष, महान व्यक्ति और किले-दुर्ग के नाम न दिए जाएं और इस प्रकार के नाम होने वाले मद्यालय नाम में बदलाव करें’, इसके लिए आदेश निकाला गया था; लेकिन ‘देवता’ में कौन से नाम ले सकते हैं ?’ यह इस आदेश में सुस्पष्ट नहीं दिया । इस कारण गृह विभाग को भी इस पर कार्यवाही करना संभव नहीं हुआ; कारण यदि किसी बार मालिक ने देवता का नाम दिया, तो भी वह संबंधित रिश्ते के व्यक्ति का है’, ऐसे कह सकते है । इस कारण २ वर्ष पूर्व निकाला गया यह शासन का आदेश केवल दिखावे जैसा है ।
१. प्रशासन के इस आदेश में ‘कौन से राष्ट्रपुरुषों के नाम ले सकते हैं , यह बताना चाहिए । इसके लिए ५६ नाम दिए गए हैं । जिनमें छत्रपति शिवाजी महाराज, जिजामाता, महाराणा प्रताप आदि सहित वर्तमान प्रधानमंत्री और वर्तमान राष्ट्रपति के नाम का भी समावेश है ।
२. किले-दुरइनकके भी १५० नाम इस आदेश में दिए गए हैं । इस कारण बार, मद्यालय, परमिट रूम को कौन से राष्ट्रपुरुष और किले-दुर्ग के नाम न दिए जाएं, यह स्पष्ट किया है । इसके विपरीत देवताओं के नाम न होने के कारण ‘देवताओं के कौन से नाम ले सकते हैं ,’ यह स्पष्ट नहीं होता ।
३. वर्तमान स्थिति में राज्य में ‘लक्ष्मी बियर बार’, ‘साईं बियर बार’ इस नाम से मद्यालय चल रहे हैं । केवल आदेश में स्पष्ट न होने के कारण मद्यालयों को दिए गए देवताओं के नामों में अभी भी बदलाव नहीं किया गया है ।
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