कानपूर (उत्तर प्रदेश) की घटना !

कानपूर (उत्तर प्रदेश) – यहां के एका ५ वर्ष के बच्चे ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका प्रविष्ट (दाखिल) कर पाठशाला के पास की शराब की दुकान हटाने की मांग की है । इस याचिका में कहा है कि यहां लोग मद्यपान करते हैं और तदुपरांत गालीगलौच करते हुए आपस में लडते रहते हैं । इसका विपरीत परिणाम बच्चों के मन पर होता है ।
सौजन्य एबीपी गंगा
१. इस याचिका की सुनवाई के समय जिला उत्पाद शुल्क विभाग ने न्यायालय को बताया कि, ‘शराब की दुकान ३० वर्षे पुरानी है और यह पाठशाला वर्ष २०१९ में आरंभ हुई ।’ (ऐसा था, तो इस पाठशाला को अनुमति कैसे मिली ? क्या उस समय प्रशासन यह नियम नहीं जानता था ? – संपादक) इसपर न्यायालय ने इस विभाग से पूछा, ‘यहां पाठशाला आरंभ होने के पश्चात दुकान की अनुज्ञप्ति का नूतनीकरण कैसे होता रहा ?’ अब इस मामले की सुनवाई १३ मार्च को होनेवाली है ।
२. रतन सदन, आजाद नगर में रहनेवाले अधिवक्ता प्रसून दीक्षित का यह बच्चा यहां के एम्.आर. जयपुरिया विद्यालय के शिशुवर्ग में सीख रहा है । उसने प्रविष्ट की याचिका पर अधिवक्ता आशुतोष शर्मा अभियोग लड रहे हैं । उन्होंने बताया कि किसी भी विद्यालय से ५० मीटर दूर ही शराब की दुकान खोलने का नियम है; परंतु यह शराब की दुकान विद्यालय से ३० मीटर की ही दूरी पर है । सवेरे लगभग ७ बजे दुकान खुलती है । दुकान के पास मद्यपान करनेवाले लोग एकदूसरे को गालीगलौच करते हैं । इस संदर्भ में जिलाधिकारी के पास परिवाद किया गया है । इसपर अभीतक कोई कार्यवाही नहीं हुई है ।
संपादकीय भूमिकाएक ५ वर्ष के बच्चे को ऐसी याचिका प्रविष्ट क्यों करनी पडती है ? क्या प्रशासन के ध्यान में यह नहीं आता ? |
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