
नई देहली – दिल्ली उच्च न्यायालय ने देहली के मुख्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर राजधानी के अतिक्रमण न किए हुए वन क्षेत्रों को ‘संरक्षित वन’ घोषित करने की अधिसूचना प्रसारित करने का आदेश दिया है । न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने देहली के वन क्षेत्र की रक्षा करने में विफल रहने के लिए देहली सरकार को फटकार लगाई । न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि दो सप्ताह के भीतर अधिसूचना प्रसारित नहीं की गई तो मुख्य सचिव को न्यायालय की अवमानना का ज्ञापन दिया जाएगा और मुख्य सचिव को न्यायालय में उपस्थित होना होगा ।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने १५ जनवरी, २०२१ को दिल्ली के मुख्य सचिव को ‘भारतीय वन अधिनियम’ की धारा २० के अंतर्गत अतिक्रमण रहित वन क्षेत्रों को ‘संरक्षित वन’ घोषित करने वाली अधिसूचना 3 महीने के भीतर प्रसारित करने का निर्देश दिया था; किन्तु न्यायालय को सूचित किया गया कि अभी तक ऐसी कोई अधिसूचना प्रसारित नहीं की गई है ।
एक विचलित करने वाली बात यह है कि ३९४ हेक्टेयर अतिक्रमित वन क्षेत्र में से ४ वर्षों की कालावधि में केवल ८२ हेक्टेयर भूमि ही मुक्त की गई है। न्यायालय ने कहा कि अधिवक्ता मदन लाल शर्मा और न्यायमित्र ने न्यायालय में सादर किया इस मुक्त भूमि पर पुन: अतिक्रमण हो गया है । न्यायालय ने कहा, यह अधिकरण के निर्देश की पूर्णरूपेण अवहेलना दर्शाता है। न्यायालय ने अतिक्रमित वन क्षेत्र को पुनः प्राप्त करने के लिए प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों का विवरण देते हुए एक व्यापक शपथ पत्र सादर करने का भी आदेश दिया। इस प्रकरण में अगली सुनवाई १५ दिसंबर को होगी ।
देहलीवासियों को भगवान की दया पर छोड दिया गया है, ऐसा कह डालें ! – न्यायालय
न्यायमूर्ति सिंह ने आदेश का अनुपालन नहीं होने पर तीव्र अप्रसन्नता व्यक्त की। दिल्ली प्रशासन क्यों व्यक्त कर रहा है हथबलता ? न्यायालय ने देहली सरकार से कहा, यदि आप असमर्थ हैं तो कहें कि ‘देहली के नागरिकों को भगवान की दया पर छोड दिया गया है, सरकार और कुछ नहीं कर सकती ।’
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