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बेंगलुरू (कर्नाटक) – भारत की सूर्य मुहिम के अंतर्गत ‘आदित्य एल १’ २ सितंबर काो सुबह ११:५० पर सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया । आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित कैप्टन सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से यह ‘पी.एस.एल.वी.-सी ५७’ रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया । इसके उपरांत ६३ मिनट में यह पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया, जहां यह १६ दिन रहेगा । इसके उपरांत यह सूर्य की दिशा में बढेगा । पृथ्वी एवं सूर्य के मध्य पृथ्वी से १५ लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित ‘लांग्राज पॉइंट १’ पर ४ माह उपरांत पहुंचेगा तथा वहां स्थिर हो जाएगा । यहां अगले ५ वर्ष रहकर ‘आदित्य एल १’ सूर्य का अध्ययन करने वाला है । इस कारण सूर्य में होने वाले परिवर्तन अंतरिक्ष एवं पृथ्वी पर जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं ? यह समझ सकते हैं । ‘इसरो’ को इस मुहिम के लिए लगभग ४०० करोड रुपए का व्यय आया है ।
‘आदित्य एल १’ के माध्यम से किस प्रकार सभी ग्रह सूर्य की अच्छे ढंग से परिक्रमा लगा रहे हैं ?, सूर्य की निर्मिति कैसे हुई ?, पृथ्वी की उत्पत्ति कहां से हुई ?, संपूर्ण सौरमंडल सूर्य से ही निकले हैं ? पृथ्वी सहित सौरमंडल के ग्रह और कहां से आए ? इन सभी बातों का अध्ययन किया जाएगा । ‘आदित्य एल १’ यह पूरी जानकारी एकत्रित करने का काम करेगा ।
सूरज के सफर पर आदित्य एल-1, श्रीहरिकोटा से हुई सफल लॉन्चिंग | #viralvideo #AdityaL1MissionLaunch #AdityaL1 pic.twitter.com/C9FD5rdMfV
— हिन्दी ख़बर | Hindi Khabar 🇮🇳 (@HindiKhabar) September 2, 2023
चीन की सूर्य मुहिम की अपेक्षा भारत की मुहिम अधिक प्रभावशाली !
भारत के पूर्व चीन ने सूर्य मुहिम चलाई है । चीन ने ८ अक्टूबर २०२२ के दिन ‘ए.एस. ओ.- एस.’ यान प्रक्षेपित किया था । जो सूर्य की दिशा मेंन जाकर पृथ्वी से ७२० किलोमीटर ऊंचाई पर रहकर अर्थात पृथ्वी की कक्षा में रहकर सूर्य का अध्ययन कर रहा है । इस तुलना में भारत का ‘आदित्य एल १’ पृथ्वी से १५ लाख किलोमीटर दूर जाकर सूर्य का अध्ययन करेगा । भारत के इस यान का भार (वजन) केवल ४०९ किलो, तो चीन के यान का भार (वजन) ८८८ किलो है । भारत का यान लगभग ४०० करोड रुपए में बना तो चीन ने उसके यान पर भारत की अपेक्षा अधिक पैसे व्यय किए हैं ।
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