भारतीय खिलाडियों को विमानतल से ही वापस बुलवाया !
(‘स्टेपल्ड वीसा’ अर्थात किसी देश में जाने के लिए अनुमति पारपत्र पर स्टैम्प न मारते हुए अलग कागद पर जानकारी लिखकर उसपर स्टैम्प मारकर वह कागद पारपत्र को ‘स्टेपल पिन’ मारकर जोडना)

नई देहली – चीन में ‘वर्ल्ड युनिवर्सिटी गेम्स’ इस नाम से आयोजित की जा रही मार्शल आर्ट स्पर्धा के लिए भारत ने अपना संघ न भेजने का निर्णय लिया है । इस संघ को विमानतल से वापस बुलवा लिया गया । इस संघ में अरुणाचल प्रदेश के ३ खिलाडियों का समावेश था; परंतु चीन ने वीसा देते समय अन्य खिलाडियों को ‘स्टैम्प वीसा’ (पारपत्र पर स्टैम्प मारकर दी जानेवाली अनुमति) दी, जबकि अरुणाचल प्रदेश के इन ३ खिलाडियों को ‘स्टेपल्ड वीसा’ जारी किया । इस प्रकार का निषेध करने के लिए भारत ने आपना संघ वापस बुला लिया ।
इस विषय में भारत के परराष्ट्र मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि चीन का यह निर्णय अस्वीकारार्ह है । इस प्रकार के बर्ताव पर योग्य ढंग से उत्तर देने का अधिकार भारत को है । भारत के वैध पारपत्र वाले नागरिकों को वीसा देते समय प्रादेशिकता के आधार पर उनमें भेदभाव न किया जाए । इस भूमिका पर हम डटे हैं । हमने इस संदर्भ में अपनी भूमिका चीन के प्रशासन को बताई है ।
(और सुनिए कहते हैं …) ‘वीसा के लिए देर से अर्ज करने से दिया था स्टेपल्ड वीसा !’ – चीन का दावा
इस विषय में चीन का कहना है कि संबंधित ३ खिलाडियों ने १६ जुलाई को वीसा के लिए अर्ज किया था । तब तक अन्य खिलाडियों की अर्ज आगे चली गई थीं । इसलिए इन ३ खिलाडियों के कागदपत्र स्वीकारे नहीं गए और उन्हें पुन: अर्ज करने के लिए बताया गया । तदुपरांत चीन दूतावास ने उनके पारपत्र ‘स्टेपल्ड’ वीसा सहित लौटा दिए ।
हमेशा ही भारतविरोधी कृत्य करनेवाला चीन !
वर्ष २०११ में चीन का ग्वांगजो की स्पर्धा के लिए अरुणाचल प्रदेश के ५ खिलाडियों को भी इसीप्रकार का स्टेपल्ड वीसा दिया गया था । वर्ष २०१३ में भी यूथ वर्ल्ड चैम्पियनशिप के लिए जानेवाले २ खिलाडियों को स्टेपल्ड वीसा दिया गया । वर्ष २०१६ में भारतीय बैडमिंटन संघ के व्यवस्थापकों ने बताया था कि वे अरुणाचल प्रदेश के होने से उन्हें चीन का वीसा नहीं मिला था ।
संपादकीय भूमिकाभारत द्वारा चीन को इसीप्रकार का प्रत्युत्तर देना आवश्यक है ! |
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