महर्षि की आज्ञा के अनुसार गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी की श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी ने की आरती !
रामनाथी (गोवा) – महर्षि की आज्ञा से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी ने गुरुपूर्णिमा के दिन अर्थात ३ जुलाई २०२३ को पूजन एवं आरती की । महर्षि ने इस दिन ‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी को बेला की पुष्पमाला अर्पित करने, आरती करने तथा शहद, खजूर एवं मुनक्कों के मिश्रण से युक्त भोग अर्पण कर पूजन करने के लिए कहा था । इसके अनुसार श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का भावपूर्ण पूजन एवं आरती की । इस अवसर पर महर्षि ने ५ लोगों को उपस्थित रहने के लिए कहा था, उसके अनुसार संतगण सद्गुरु डॉ. मुकुल गाडगीळजी, पू. पृथ्वीराज हजारेजी एवं पू. संदीप आळशीजी उपस्थित थे, साथ ही श्री. भानू पुराणिक एवं श्री. सिद्धेश करंदीकर उपस्थित थे । सनातन पुरोहित पाठशाला के पुरोहित श्री. अमर जोशी एवं श्री. ईशान जोशी ने इस अनुष्ठान का पौराहित्य किया । |

मुंबई, ३ जुलाई (संवाददाता) – माया के भवसागर से शिष्य एवं भक्त को धीरे से बाहर निकालनेवाले, उससे आवश्यक साधना करवानेवाले तथा कठिन समय में उसे निरपेक्ष प्रेम से आधार देकर संकटमुक्त करनेवाले गुरु ही होते हैं । ऐसे परमपूजनीय गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन होता है गुरुपूर्णिमा ! सनातन संस्था की ओर से पूरे देश में ७२ स्थानों पर ‘गुरुपूर्णिमा महोत्सव’ भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया । महोत्सव के आरंभ में श्री व्यासपूजा तथा सनातन संस्था के श्रद्धा के केंद्र प.पू. भक्तराज महाराजजी की प्रतिमा का पूजन किया गया । गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में अनेक साधकों ने भावाश्रुओंसहित श्री गुरुचरणों में कृतज्ञता व्यक्त की ।
इस अवसर पर मान्यवर वक्ताओं ने उपस्थित जिज्ञासुओं से ‘धर्माचरण एवं साधना करने से ही वास्तव में धर्म की तथा हमारी भी रक्षा होती है । साधना के कारण ही अंतर की दिव्य ऊर्जा जागृत होती है, मनोबल बढता है तथा आत्मशक्ति बढती है । इस दिव्यशक्ति के आधार से हिन्दू धर्म की एवं इस देवभूमि भारत की रक्षा होना सहजसुलभ होनेवाला है । अतः हिन्दू देवभूमि भारत की रक्षा एवं धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करने हेतु गुरुपूर्णिमा का के उपलक्ष्य में साधना करने का निश्चय करें’, ऐसा आवाहन किया । ऑनलाइन गुरुपूर्णिमा महोत्सव सनातन संस्था की ओर से मराठी, कन्नड, अंग्रेजी, तेलुगु, तमिल एवं मलयालम् भाषाओं में भी ‘ऑनलाइन गुरुपूर्णिमा’ महोत्सव संपन्न हुए ।

कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के आध्यात्मिक स्तर के अनुसार, उनके विभिन्न समय के छायाचित्र से उनके सगुण-निर्गुण स्पंदनों का सद्गुरु डॉ. मुकुल गाडगीळजी द्वारा किया अभ्यास
अधिवक्ता रामदास केसरकर द्वारा प.पू. डॉक्टरजी का द्रष्टापन अनुभव करना !
‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का वाक्य ब्रह्मवाक्य होता है’, इसकी १८ वर्ष उपरांत हुई प्रतीति !