
केंद्रशासन ने अभी अभी ‘पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ अर्थात ‘पी.एफ.आइ.’ पर प्रतिबंध लगाया । इस संगठन का राजकीय पक्ष ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया’ पर भी (‘एस.डी.पी.आइ.’ पर भी) कार्यवाही होने की संभावना व्यक्त की जा रही है । जिहादी मानसिकता रखकर आतंकवाद का समर्थन करनेवाले संगठनों पर बंदी लगाने से कुछ सीमा तक ‘इस्लामी कट्टरतावाद को धक्का लगने की संभावना है’, ऐसा कह सकते हैं; किंतु इसकी जडें दूर तक फैली हैं । मूल में, आतंकवादी भारत में ‘गजवा-ए-हिन्द’ लाना चाहते हैं । गजवा-ए-हिन्द का लक्ष्य साध्य करने के लिए ‘मूर्तिपूजा करनेवालों की हत्या करो’, ‘संपूर्ण विश्व पर इस्लामी धर्म का वर्चस्व प्रस्थापित करो’ और ‘सभी का धर्मांतर करो’, ऐसा करने को कहा है । यह ‘एजेंडा’ कट्टर मौलवी और अलगाववादियों ने बनाया है ।
जिहादी आतंकवादी भारत में इस्लामी राष्ट्र लाना चाहते हैं । इस विषय में इस्लामिक विद्वान रिजवान अहमद ने कहा है, ‘अबतक गझवा-ए-हिन्द का ५० प्रतिशत ध्येय पूरा हुआ है । वर्ष २०५० तक देश के मुसलमानों की जनसंख्या २५ प्रतिशत हो जाएगी ।’
मुसलमान मुख्यमंत्री बनने के लिए २५ प्रतिशत जनसंख्या पर्याप्त होती है । मुसलमानोें की संख्या २९ प्रतिशत तक होने पर आनेवाले ५० से ६० वर्षाें में भारत का प्रधानमंत्री मुसलमान होगा । इससे आतंकवादी संगठनों पर बंदी लगाना तथा जिहादी आतंकवादियों को दंड देना कितना आवश्यक है यह ध्यान में आएगा; किंतु इस से भी आगे जाकर पूरे विश्व में जो गजवा-ए-हिन्द के सपने देख रहे हैं, उनका सामना कर भारत के हिन्दुओं की रक्षा करना, आनेवाले समय में यह बहुत बडा दायित्व निभाना होगा ।
आक्रामकों का आदर्श (?) !
विगत सहस्रों वर्षों से इस्लामिक कट्टरपंथी भारत को इस्लामिस्तान बनाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं । बीते समय के मुसलमान आक्रामकों ने केवल भारत की संपत्ति ही नहीं लूटी, अपितु इस भूमि से हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति और हिदुओं को नष्ट कर इस देश पर हरा ध्वज फहराने का सपना देखा ।
उस समय हिन्दुओं के पराक्रम के कारण उनका यह सपना कभी पूरा नहीं हो सका । अब इसी सपने को देखते हुए पूरे विश्व के जिहादी, आतंकवादी और धर्मांध भारत को और हिन्दुओं को लक्ष्य बना रहे हैं । पी.एफ.आइ. संगठन दूसरे नाम पर क्या उसका कार्य करता रहेगा?, क्या इस संगठन से संबंधित ५० लक्ष कार्यकर्ताओं पर कार्यवाही होगी ? ऐसे विविध विषयाें पर विस्तृत चर्चा की जा रही है; किंतु इस संगठन ने गजवा-ए-हिन्द के लिए हिन्दुओं में निर्मित किए भय (दहशत) पर कोई नहीं बोलता ।
आज पी.एफ.आइ.पर बंदी लगाई गई, तो भी गजवा-ए-हिन्द से प्रेरित अनेक जिहादी युवक कल दूसरे नाम से कोई संगठन बनाकर हिन्दू विरोधी कार्यवाहियां करते ही रहेंगे । उन्हें कैसे रोकें ? इसलिए केवल भारत के ही नहीं, अपितु पूरे विश्व के जिहादी गजवा-ए-हिन्द का सपना तो क्या, इन शब्दों को उच्चारने का भी साहस नहीं कर पाएं, भारत को इतना भय उत्पन्न करना आवश्यक है ।
आज की परिस्थिति को देखते हुए ‘भारत से संकट टल गया’, ऐसा नहीं कह सकते, अपितु पी.एफ.आइ.की कार्यवाहियाें के कारण हमारे ध्यान में इस संकट की व्याप्ति आई, हम इतना ही कह सकते हैं । शासन के समक्ष इस संकट को परास्त करने का बहुत बडा आव्हान (चैलेंज) है ।
धर्मांध संगठनों, चलते बनो !
स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी ने हिन्दू राष्ट्र की मांग की थी । स्वतंत्रता पूर्व ऐसी मांग करनेवाले वे एकमेव थे । विगत कुछ वर्षों से सनातन संस्था हिन्दू राष्ट्र की मांग का समर्थन कर रही है; धीरे धीरे अन्य हिन्दुओं को इसका महत्त्व ध्यान में आने से अब अनेक लोग बडे स्तर पर हिन्दू राष्ट्र का उद्घोष करने लगे हैं । भारत और हिन्दू धर्म के लिए इसे आशावादी कदम ही कहना होगा ।
हिन्दू राष्ट्र में सच्चे अर्थ में आध्यात्मिक उत्कर्ष साध्य होनेवाला है; किंतु ऐसा न हो कर ‘गजवा’ के चंगुल में फंसने पर हिन्दुओं को पग-पग पर अन्याय एवं अत्याचार का ही सामना करना पडेगा, यह निश्चित है । कट्टरतावादी, पुरो(अधो)गामी, निधर्मीवादी ‘हिन्दू राष्ट्र’ संकल्पना का विरोध करते दिखाई देते हैं; क्योंकि उनकी बुद्धि में हिन्दू राष्ट्र का सामर्थ्य और उसकी परिणामकारकता थोडी सी भी नहीं आती ।
‘हिन्दू राष्ट्र’ और ‘इस्लामी राष्ट्र’ की तुलना कभी भी नहीं हो सकती । इस समय भी विश्व में अनेक इस्लामी राष्ट्र हैं; किंतु क्या वहां की जनता सचमुच सुखी, समाधानी एवं आनंदित है ? नहीं ! वहां का इस्लामी शासन क्या भयंकर प्रकरण कर रहा है, यह सभी देख रहे हैं ।
इसलिए भारत में कदापि ‘अन्यायकारक इस्लामी राष्ट्र नहीं बनने देना है’, भारतीय एवं हिन्दुओं को ऐसा दृढ निश्चय करना चाहिए । हिन्दूबहुल भारत, इस्लामी राष्ट्र के रूप में तो कभी उभरेगा ही नहीं; अपितु धर्माभिमानी हिन्दू और भारतीयों को दृढतापूर्वक ऐसी घातक इच्छा रखनेवालों का सामना करना चाहिए । पी.एफ.आइ. पर जिस प्रकार बंदी लगाई गई, उसी प्रकार जिहादी कृत्य करनेवालों पर भी कार्यवाही होना आवश्यक है ।
अनेक लोगों के मन में हिन्दू राष्ट्र की सुप्त इच्छा अब प्रबल हो रही है तथावह कृतिशीलता और गतिमानता का रूप ले रही है । स्वातंत्र्यवीर सावरकरजी द्वारा भारतीयों के मन में बोया हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का बीज आनेवाले कुछ वर्षाें में ही अंकुरित (साकार) होनेवाला है ।
भव्य, व्यापक और तेजःपुंज हिन्दू राष्ट्र के समक्ष इस्लामी राष्ट्र टिक नहीं पाएगा । तब धर्मांध संगठनों को इस देश से पलायन करना ही होगा, धर्मांध समर्थकों को यह ध्यान में रखना चाहिए ! ऐसा होने पर सर्वत्र एक ही उद्घोष होगा, ‘हिन्दू राष्ट्र की विजय हो, विजय हो, विजय हो !’

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