
नई देहली : यहां वसंत विहार परिसर के ´गुरु हरकिशन सिंह पब्लिक स्कूल´ में श्री सरस्वती देवी की पूजा करने वाली एक संगीत शिक्षिका को निलंबित कर दिया गया है । यह विद्यालय ‘देहली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी’ द्वारा चलाया जाता है । इस कमेटी ने इस पूजा का विरोध किया था । सिख नेताओं द्वारा पूजा पर आपत्ति जताए जाने के उपरांत समिति ने अब प्रकरण की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है ।
महिला शिक्षक ने कराई सरस्वती पूजा, स्कूल ने कर दिया निलंबित: दिल्ली का यह स्कूल चलता है गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के फंड से#SaraswatiPuja #DGMC #school https://t.co/pQWg9mBp2t
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) January 28, 2023
देहली सिक्ख
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि इस शिक्षिका ने मूर्ति रखकर श्री सरस्वती देवी की पूजा की थी । यह जानकारी सामने आने पर हमने आपत्ति जताई । इसके उपरांत विद्यालय के प्राचार्य ने शिक्षक को ज्ञापन दिया । इस पर शिक्षिका ने उत्तर दिया कि ‘प्रत्येक वर्ष हम इसी प्रकार पूजा करते आ रहे हैं ।’ इसके उपरांत शिक्षिका को निलंबित कर दिया गया । हमारी कमेटी शिक्षा को लेकर सिक्खों की मर्यादाओं का पूर्ण रूप से ध्यान रखती है । प्रकरण की जांच के लिए नियुक्त कमेटी इस तथ्य का पता लगाएगी कि कहीं इस पूजा के पीछे कोई राजनीतिक षड्यंत्र तो नहीं है । यदि इसी तरह मूर्तियों की पूजा होती रही तो विपक्षी दल हमें लक्ष्य कर सकते हैं ।
संपादकीय भूमिकाहिन्दुओं ने सिक्खों को कभी अलग नहीं समझा एवं सिक्खों ने अब तक कभी हिन्दुओं को अलग नहीं समझा, किन्तु जैसे-जैसे सिक्खों में खालिस्तानी विचारों का प्रभाव दिनों दिन बढ़ता जा रहा है, ऐसी घटनाएं अब होने लगी हैं । इस पर गंभीरता से विचार करते हुए देशभक्त तथा समझदार सिक्खों को आगे आना चाहिए एवं हिन्दू विरोधी घटनाओं का विरोध करना चाहिए ! |
सिक्खों का पैसा उन्हीं के लिए खर्च किया जाए ! – कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हरविंदर सिंह सरना
देहली सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हरविंदर सिंह सरना ने कहा कि कमेटी द्वारा संचालित विद्यालयों में मूर्ति पूजा की परंपरा नहीं है । सिक्खों की मर्यादाओं को चुनौती देने की कई घटनाएं हुई हैं । ये विद्यालय कमेटी द्वारा चलाए जाते हैं तथा यहां सभी धर्मों के बच्चे पढ़ते हैं । सिक्ख कमेटी का पैसा सिक्खों तथा उनके गुरुओं की शिक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए ।
संपादकीय भूमिकाइसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि अब हिन्दू यह मांग करें कि हिन्दुओं का एवं हिन्दुओं के सरकारी मंदिरों का धन हिन्दुओं तथा उनके धर्म पर ही खर्च किया जाना चाहिए । |
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