१४.९.२०२२ को हिन्दी राजभाषा दिन है । इस उपलक्ष्य में…

१. हिन्दी की विशेषताएं
अ. ‘राष्ट्रभाषा की धारणा धर्म के सात्त्विक नीतिमूल्यों पर आधारित है । हिन्दी भाषा में किए जानेवाले व्यवहार रजोगुणी तरंगों से संबंधित हैं । यह धारणा राष्ट्र के स्वयंचलित आदर्श मूल्यों को समाज की पीढियों पर संस्कारित कर उन्हें कार्यप्रवण करती है । राष्ट्र समाज के रजोगुणी मूल्यों के कार्यक्षम अवस्था की गति पर चलनेवाला है ।’
२. हिन्दी भाषा पर संस्कृत का परिणाम
संस्कृत के माध्यम से शब्दों को प्राप्त गति हिन्दी के उत्थापन का निमित्त है ।
३. हिन्दी का परम कर्तव्य
राष्ट्र को धर्मक्रांति संबंधी तेजस्वी गौरव से सुशोभित विचार देकर समर्थ वेगवान कार्यकारी स्तंभ के आधार पर उसकी रचना करना ही हिन्दी का परम कर्तव्य है ।
राष्ट्र की एकता हेतु हिन्दी भाषा का महत्त्व
‘हिन्दुस्तान में मराठी, हिन्दी, तेलुगु, कन्नड, मलयालम, ओडिया, बांग्ला, असमिया, गुजराती, मारवाडी, गुरुमुखी, कोंकणी आदि भाषाएं हैं । राष्ट्रभाषा ‘हिन्दी’ नाममात्र हेतु है । देश में अधिकतर शिक्षा अंग्रेजी भाषा में दी जाती है । हिन्दी सर्वमान्य न होने के कारण एक प्रांत के लोगों का अन्य प्रांत के लोगों से संवाद करना कठिन होता है । जहां संभाषण ही नहीं हो सकता, वहां निकटता कैसे होगी एवं निकटता नहीं होेगी, तो राष्ट्र की एकता कैसे अखंडित रहेगी ? राष्ट्र की एकता का विचार करते हुए हिन्दी का विशेष महत्त्व ध्यान में आएगा ।’ ‘न्यूयॉर्कके ‘वैश्विक भाषा विभाग’ द्वारा किए शोध के अनुसार विश्व में मुख्य रूप से बोली जानेवाली भाषाओं में अंग्रेजी एवं चीनी भाषाओं के पश्चात हिन्दी भाषा का क्रमांक आता है । नेपाल, साथ ही काबुल-कंधार (अफगानिस्तान) से लेकर ढाका तक हिन्दी भाषा का उपयोग ‘बोलीभाषा’ के रूप में किया जाता है । मौरिशस एवं फिजी देश की व्यावहारिक भाषा हिन्दी है ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
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