ज्ञानवापी का मामला

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – यदि सत्य छुपाकर वातावरण शांत करने का प्रयास किया जा रहा होगा, तो यह स्वीकार नहीं । इसके विपरीत उन्हें लज्जा लगनी चाहिए कि इतने वर्ष सत्य छुपाकर रखा गया । वातावरण बिगडने की जो कोई धमकी दे रहा है, उन्हें शरण आना चाहिए । यदि ‘वजू खाने में (नमाज के पहले हाथ-पैर धोने की जगह) मिला शिवलिंग न होकर फव्वारा है’, ऐसा है तो वे फव्वारा चलाकर दिखाए । साढे तीन सौ वर्ष पहले ऐसा कौन सा तंत्रज्ञान था, जिसके द्वारा फौवारा चलाया जाता था ? ऐसा प्रश्न ज्ञानवापी प्रकरण में अधिवक्ता (पू.) हरि शंकर जैन ने मीडिया से बात करते समय किया । पू. जैन का स्वास्थ्य बिगडने से उन्हें अस्पताल में भरती किया गया था । अस्पताल से वापस आने के बाद वे मीडिया से बात कर रहे थे ।
सौजन्य : News इंडिया
१. पू.(अधिवक्ता) जैनजी ने आगे कहा कि शिवलिंग परिसर के अंदर है । यदि यहां के व्यास कक्ष की जांच की, तो और सत्य सामने आएंगे । परंतु सौहार्द्र के नाम पर हमारा कानूनी अधिकार छीनने का प्रयास किया जा रहा है ।
२. एम.आई.एम. के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी शिवलिंग के स्थान पर फव्वारा होने की बात कही है । इस पर पू. (अधिवक्ता) जैनजी ने कहा कि उनका ज्ञान अधिक हो सकता है; परंतु जहां शिवलिंग मिला, वह स्थान भगवान शिव का है । वहां मस्जिद हो ही नहीं सकती । खुदाई करने पर और कुछ बातें सामने आएंगी ।
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