
रायपुर (छत्तीसगढ) – काँग्रेस शासित छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ९ मार्च के दिन राज्य की विधानसभा में २०२२-२३ इस वित्तवर्ष के लिए आर्थिक बजट प्रस्तुत किया । इस समय मुख्यमंत्री बघेल ने गोबर से बनाए गए बक्से को (ब्रीफकेस) हाथ में पकडा था । आर्थिक बजट प्रस्तुत करने के लिए मुख्यमंत्री ने गोबर से बने बक्से का प्रयोग करना यह देश की पहली ही घटना है । यह बक्सा रायपुर गोकुल धाम गौशाला में कार्यरत ‘एक पहल’ इस महिला बचत समूह की महिलाओं ने तैयार किया है ।
इस बक्से की विशेषता यह है कि यह गोबर का चूरा, चूने का चूरा, मैदा, लकडी और गवार गोंद का मिश्रण परत दर परत लगाकर तैयार करने का इस समूह की महिलाओं ने बताया ।
Chhattisgarh CM Baghel carries briefcase made of cow dung to present state Budget 2022-23
Read @ANI Story | https://t.co/HoejUWa5Sn#Chhattisgarh #BhupeshBaghel pic.twitter.com/FxTZxhGOPR
— ANI Digital (@ani_digital) March 9, 2022
गोबर ,यह श्री महालक्ष्मी देवी का प्रतीक !
छत्तीसगढ में ऐसा माना जाता है कि, गोबर श्री महालक्ष्मी देवी का प्रतीक है । यह ध्यान में लेकर बचत समूह की महिलाओं ने ‘गोबर का बक्सा’ बनाया है, जिससे मुख्यमंत्री के हाथों इस बक्स द्वारा छत्तीसगढ के प्रत्येक घर में लक्ष्मी का प्रवेश होगा और छत्तीसगढ का प्रत्येक नागरिक आर्थिक रुप से सक्षम हो सकेगा ।
छत्तीसगढ में है ‘गोधन न्याय योजना’ !
छत्तीसगढ में वर्ष २०२१ में ‘गोधन न्याय योजना’ का प्रारंभ किया गया है । इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार पशुपालक किसानों से गोबर खरीदती है । सरकार ने इसके लिए राज्य में अलग अलग ‘गो शालाएं’ भी निर्माण की है । इसमें गायों की देखभाल करना और उनके गोबर से वर्मीकम्पोस्ट तैयार करना शामिल है। पिछले वर्ष गांधी जयंती के दिन मुख्यमंत्री ने गोबर से बिजली तैयार करने की परियोजना का शुभारंभ किया था ।
तुर्भे रेलस्थानक के पास के पदपथों के नवीनीकरण का काम आरम्भ हुआ ।
२ राज्यों से गोहत्याएं एवं लव जिहाद की ३ घटनाएं सामने आईं ।
Ram Mandir Donation Theft : श्रीराम मंदिर में दान की चोरी के उपरांत अब मंदिर के सरकारीकरण की संभावना
भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठियों को लौटाते समय बांग्लादेश की ओर से भीषण विरोध
इस्लाम स्वीकार करने पर स्वयं ही ‘पिछडा वर्ग मुसलमान’ का दर्जा नहीं मिल सकता ! – Madras High Court
तुम्हारे पास वर्दी है, इसलिए क्या आप कुछ भी कर सकते हैं ? – Karnataka High Court