
नई देहली : युद्ध के कारण, युक्रेन में चिकित्सकीय शिक्षा ले रहे भारतीय छात्रों को भारत वापस लाया जा रहा है ; परंतु, इस युद्ध के कारण उनकी शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें भारतीय चिकित्सालय महाविद्यालयों में प्रवेश देने पर भारत सरकार विचार कर रही है । इसके लिए, केंद्र सरकार फॉरेन मेडिकल ग्रैज्यएट लाइसेन्शिएट रेग्युलेशन (एफ्.ए.एम्.जी.एल्.) एक्ट में बदलाव करने पर विचार कर रही है । इस विषय में बहुत शीघ्र ही बैठक होने की संभावना है ।
हेल्थ मिनिस्ट्री की एनएमसी को चिट्ठी:यूक्रेन से लौटे 16 हजार मेडिकल छात्रों की पढ़ाई देश के मेडिकल कॉलेजों में कराने की तैयारी, रास्ता तलाश रही केंद्र सरकारhttps://t.co/pgsRAiltFw#MedicalStudent #UkraineRussia #IndiansInUkraine pic.twitter.com/2crhtJUNPW
— Dainik Bhaskar (@DainikBhaskar) March 3, 2022
विदेशी चिकित्सकीय महाविद्यालयों में शिक्षा ले रहे छात्रों को पाठ्यक्रम पूर्ण करने के अतिरिक्त, भारत के बाहर ही प्रशिक्षण और इंटर्नशीप करनी पडती है । युक्रेन में एम्.बी.बी.एस्. ६ वर्ष का होता है और उसके उपरांत प्रशिक्षण (इंटर्नशिप) होती है । अब युद्ध के कारण शिक्षा में बाधा उत्पन्न होने से सहस्रों बच्चों का भविष्य संकट में आएगा । इन छात्रों को सरकारी महाविद्यालयों में प्रवेश मिलने की संभावना नहीं है । उन्हें निजी और अनुदानित महाविद्यालयों में प्रवेश मिल सकता है । युक्रेन में युद्ध के कारण मूलभूत सुविधाएं ध्वस्त हो जाने से, उन्हें इस समय ऑनलाइन शिक्षा देना संभव न होने की बात कही जा रही है ।
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