सर्वत्र के अर्पणदाताओं के लिए दान देने का स्वर्णिम अवसर !

‘सनातन संस्था राष्ट्ररक्षा एवं धर्मजागृति के लिए प्रतिबद्ध है । संस्था के आश्रमों और सेवाकेंद्रों से निरंतर धर्मप्रसार का कार्य किया जाता है । आज के समय में धर्मग्लानि का काल होने से ‘धर्मप्रसार करना’, काल के अनुसार आवश्यक कार्य बन गया है । ‘‘धर्मप्रसार का कार्य करनेवाले संतों, संस्थाओं अथवा संगठनों को अन्न-अनाज का दान देना’ सर्वश्रेष्ठ दान है ।
आज के समय में राष्ट्र एवं धर्म की सेवा करने का महत्त्व ध्यान में लेकर साधक आश्रम में रहकर पूर्णकालीन सेवा कर रहे हैं । उसके कारण सनातन के रामनाथी आश्रम में अनाज की आवश्यकता होती है । ६ महिनों के लिए आश्रम के साधकों के लिए आवश्यक अनाजों, दलहनों आदि की सूची यहां दी गई है ।

जो पाठक, हितचिंतक और धर्मप्रेमी उक्त अनाज, दलहनें आदि अर्पण के स्वरूप में दे सकते हैं अथवा उसकी करीद के लिए धन के रूप में यथाशक्ति सहायता करने के इच्छुक हैं, वे निम्न चल-दूरभाष क्रमांक पर संपर्क करें –
नाम एवं संपर्क क्रमांक : श्रीमती भाग्यश्री सावंत – 7058885610
संगणकीय पता : [email protected]
डाक पता : श्रीमती भाग्यश्री सावंत, द्वारा ‘सनातन आश्रम’, २४/बी, रामनाथी, बांदिवडे, फोंडा, गोवा. पिन – ४०३४०१
इसके लिए धनादेश देना हो, तो उसे ‘सनातन संस्था’ इस नाम से निकालें ।’ – श्री. वीरेंद्र मराठे, व्यवस्थापकीय न्यासी, सनातन संस्था.
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?