गुरुपूर्णिमा के अवसर पर हिन्दू-राष्ट्र स्थापना हेतु सक्रिय होने का निश्‍चय करें ! – सद्गुरु डॉ. पिंगळे

उत्तर भारत में विभिन्न ऑनलाइन समारोह का आयोजन !

सद्गुरु डॉ. चारुदत्त प्रभाकर पिंगळेजी

     दिल्ली – ‘शिष्य की आध्यात्मिक उन्नति के साथ धर्मसंस्थापना करना, यह गुरु परंपरा का कार्य रहा है । श्रीकृष्ण-अर्जुन, चाणक्य-चंद्रगुप्त, समर्थ रामदास स्वामी-छत्रपति शिवाजी महाराज, रामकृष्ण परमहंस-स्वामी विवेकानंद ऐसे कई उदाहरण है, जिनके द्वारा धर्मसंस्थापना का कार्य हुआ । वर्तमान समय में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करना, यह धर्मसंस्थापना का ही कार्य है । गुरुपूर्णिमा के अवसर पर इसके लिए सक्रिय होने का निश्‍चय करें’, ऐसा प्रतिपादन हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने किया । वे १४ जुलाई को आयोजित हिन्दू-संगठन समारोह को संबोधित कर रहे थे ।

     हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से गुरुपूर्णिमा के पूर्व हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के विषय में जागृति हेतु विभिन्न समारोह का आयोजन किया गया । इसमें रविवार, ४ जुलाई को धर्मशिक्षा वर्ग से जुडे धर्मप्रेमी, ८ जुलाई को समिति की वेबसाइट से जुडे धर्मप्रेमी, ११ जुलाई को धर्मप्रेमी और साधकों के परिचित एवं सगे-संबंधी और १४ जुलाई को हेल्पलाइन से जुडे धर्मप्रेमियों के लिए ‘हिन्दू-संगठन समारोह’ का आयोजन किया गया । इन ४ कार्यक्रमों में दिल्ली, जम्मू, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, पश्‍चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान से कुल ४६० धर्मप्रेमियों ने सहभाग लिया ।

     सद्गुरु डॉ. पिंगळेजी ने आगे बताया कि ‘महाभारत के काल में कौरव संख्या बल में अधिक थे और पांडव केवल ५ थे । कौरव सेक्युलर और लेफ्टिस्ट की भांति थे, जिनको धर्म से कटिबद्धता नहीं चाहिए । आज धर्मविरोधी सेक्युलर या लेफ्टिस्ट के तुलना में धर्मबल युक्त हिन्दू भले ही ५ प्रतिशत है, पर हम संवैधानिक मार्ग से उनका विरोध कर विजय प्राप्त कर सकते हैं; परंतु इसके लिए आज हिन्दुओं को धर्मशिक्षा लेकर और धर्म का आचरण कर धर्मबल प्राप्त करने की आवश्यकता है । साथ ही छद्म सेक्युलरिज्म को हटाकर भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए सभी हिन्दुओं को कटिबद्ध होना पडेगा ।’ इस समारोह में हिन्दू जनजागृति समिति के प्रेरणास्रोत परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी के कार्य के विषय में सभी को जानकारी दी गई । साथ ही गुरुकृपा का अर्थ, गुरु का जीवन में महत्त्व, गुरुकृपा कैसे कार्य करती है एवं गुरुकृपा प्राप्त करने हेतु क्या प्रयास करें आदि विषयों पर धर्मप्रेमियों का मार्गदर्शन हुआ । शंका-समाधान और अनुभव कथन के सत्र में भी धर्मप्रेमियों ने उत्स्फुर्त सहभाग लिया ।

अभिमत

१. जितेंद्र सेनगुप्ता – इस समारोह के माध्यम से गुरु के विषय में अच्छी जानकारी मिली । आज सरकारी स्कूल या कॉन्वेंट स्कूल में गुरु के बारे में कुछ नहीं बताया जाता ।

२. श्री. शिवनाथ मिश्रा, सिंगरौली, मध्य प्रदेश – हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के विचार का प्रसार होने के लिए १ सहस्र से अधिक लोगों तक गुरुपूर्णिमा का आमंत्रण देने के लिए प्रयास करेंगे ।

साप्ताहिक सत्संग से जुडे जिज्ञासुओं के लिए ‘विशेष सत्संग’ का आयोजन !

     देहली – सोमवार, ५ जुलाई को गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में उत्तर भारत में चलनेवाले ६ साप्ताहिक ऑनलाइन साधना सत्संग से जुडनेवाले जिज्ञासुओं के लिए एक विशेष सत्संग का आयोजन किया गया । इसमें ‘गुरुपूर्णिमा का साधना के दृष्टि से कैसे लाभ करवा लें ? सत्सेवा और त्याग के द्वारा हम गुरुतत्त्व का कैसे लाभ ले सकते हैं ?’ इस विषय में जिज्ञासुआेंका मार्गदर्शन हुआ । इस विशेष सत्संग में जिज्ञासुओं ने साधना के उपरांत आई अनुभूतियां और स्वयं में हुए परिवर्तन के विषय में भी बताया । इस कार्यक्रम में दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान से ६० जिज्ञासु जुडे थे । इसमें जुडे जिज्ञासुओं के अनुरोध पर सोशल मीडिया द्वारा धर्मप्रसार कैसे करें, इस विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया ।